‘अकिल एड़पा’ से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर, 55 स्कूलों में बच्चों को पढ़ाएंगे प्रशासनिक अधिकारी
By Team orange hindi

हर गुरुवार विद्यालयों में पहुंचेगा प्रशासन, विद्यार्थियों की शैक्षणिक समस्याओं का होगा समाधान


लोहरदगा। जिले में मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष शैक्षणिक पहल ‘अकिल एड़पा’ शुरू की है। उपायुक्त संदीप कुमार मीना के मार्गदर्शन में तैयार इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक गुरुवार को प्रशासनिक पदाधिकारी चिन्हित विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद करेंगे और उन्हें पढ़ाई में आवश्यक मार्गदर्शन देंगे।
इस पहल के दायरे में जिले के 55 विद्यालयों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने, विषयगत कठिनाइयों को दूर करने, नियमित उपस्थिति बढ़ाने और आगामी मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम हासिल करने की दिशा में काम करना है।
विद्यालय पहुंचकर अधिकारियों ने ली कक्षाएं
कार्यक्रम के तहत प्रशासनिक पदाधिकारी अपने-अपने आवंटित विद्यालयों में पहुंचे और विद्यार्थियों की पढ़ाई से जुड़ी स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने संबंधित विषयों के पाठ्यक्रम की प्रगति की जानकारी ली तथा विद्यार्थियों को कई विषयों के पाठ्यक्रम से जुड़े पाठ भी पढ़ाए।
इसके अलावा विद्यालयों की शैक्षणिक और आधारभूत व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया गया। विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी विषयगत समस्याओं और पढ़ाई के दौरान आने वाली कठिनाइयों को समझने का प्रयास किया गया।
शिक्षक और विद्यार्थियों की उपस्थिति पर नजर
विद्यालयों में पहुंचने वाले पदाधिकारियों ने शिक्षकों की उपस्थिति की जांच की। अनुपस्थित शिक्षकों के संबंध में कारणों की जानकारी ली गई। वहीं कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की उपस्थिति की भी समीक्षा की गई।
लगातार तीन दिनों से अधिक समय तक विद्यालय से अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से फोन के माध्यम से संपर्क कर बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने की अपील की गई। जिन अभिभावकों से फोन पर संपर्क नहीं हो सका, उनके घर जाकर भी विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति के महत्व से अवगत कराया गया।
विद्यालयों की सुविधाओं का भी लिया जायजा
प्रशासनिक पदाधिकारियों ने विद्यालय भवन और कक्षाओं की स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान शौचालय, रनिंग वाटर, बिजली, चाक-बोर्ड, मानचित्र, पुस्तकालय, डिजिटल टूल्स और पढ़ाई के लिए उपलब्ध अन्य संसाधनों की जानकारी ली गई।
पाठ्यक्रम समय पर पूरा करने पर जोर
अधिकारियों ने शिक्षकों से पाठ्यक्रम की प्रगति की जानकारी लेते हुए यह भी देखा कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर पाठ्यक्रम पूरा हो रहा है या नहीं। विद्यालय के पिछले परीक्षा परिणामों की भी समीक्षा की गई।
विद्यार्थियों से संवाद के दौरान यह जानने का प्रयास किया गया कि किन विषयों या अध्यायों को समझने में उन्हें कठिनाई हो रही है। भाषा संबंधी परेशानी होने पर भी जानकारी ली गई। अधिकारियों ने शिक्षकों के साथ चर्चा कर विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया।
मैट्रिक और इंटर के महत्वपूर्ण विषयों पर फोकस
मैट्रिक परीक्षा की तैयारी के लिए अंग्रेजी, हिंदी, गणित, विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वहीं इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी, हिंदी, गणित, भौतिकी, रसायनशास्त्र, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, बिजनेस मैनेजमेंट, इतिहास, भूगोल और अकाउंटेंसी सहित अन्य विषयों की तैयारी कराई जा रही है।
ऑनलाइन कक्षाओं की भी होगी शुरुआत
कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने विषयवार शिक्षकों का पैनल तैयार किया है। इन शिक्षकों के माध्यम से इंटरैक्टिव पैनल और डिजिटल माध्यम से विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए विषयवार कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इससे विद्यार्थियों को विशेषज्ञ शिक्षकों से मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।
प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई विद्यालयों की जिम्मेदारी
‘अकिल एड़पा’ कार्यक्रम के तहत जिले के विभिन्न प्रशासनिक एवं शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों को विद्यालयों की जिम्मेदारी दी गई है। उप विकास आयुक्त राज महेश्वरम, पीडी आइटीडीए सुषमा नीलम सोरेंग, उप निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी अमित कुमार सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रत्येक प्रशासनिक पदाधिकारी को एक से तीन विद्यालय आवंटित किए गए हैं, ताकि विद्यालयों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखते हुए विद्यार्थियों की पढ़ाई और उपस्थिति की निगरानी की जा सके।
प्रशासन और स्कूलों के बीच बनेगा सीधा समन्वय
जिला प्रशासन का मानना है कि ‘अकिल एड़पा’ के माध्यम से प्रशासन और विद्यालयों के बीच सीधा समन्वय स्थापित होगा। अधिकारियों की नियमित उपस्थिति से विद्यार्थियों को शैक्षणिक मार्गदर्शन मिलने के साथ विद्यालयों की समस्याओं की पहचान और उनके समाधान में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम के माध्यम से प्रशासन का लक्ष्य आगामी मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में जिले का परिणाम शत-प्रतिशत करने के साथ विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और परीक्षा की प्रभावी तैयारी उपलब्ध कराना है।