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मेगा विधिक सशक्तिकरण शिविर में लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का किया गया वितरण

By Team Lohardaga live

Administrative
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी व लाभुक

महिलाओं को विधिक अधिकारों की जानकारी अनिवार्य : प्रेमलता त्रिपाठी

लोहरदगा। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार लोहरदगा राजकमल मिश्रा के मार्गदर्शन में शनिवार को सदर प्रखंड परिसर स्थित नए टाउन हॉल में मेगा विधिक सशक्तिकरण शिविर का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन एवं डालसा, लोहरदगा के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस शिविर का शुभारंभ प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय प्रेमलता त्रिपाठी, उपायुक्त डॉ. ताराचंद, पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी, एसडीओ अमित कुमार तथा अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हेमंत कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों को पौधा भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन डालसा सचिव राजेश कुमार ने किया।

मुख्य अतिथि प्रेमलता त्रिपाठी ने कहा कि महिलाओं के लिए विधिक सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। जब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी, तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि विधिक प्रावधानों के माध्यम से हर व्यक्ति अपने न्याय की प्राप्ति कर सकता है। कई महिलाएं सामाजिक एवं पारिवारिक समस्याओं का सामना करती हैं, जिन्हें जागरूक करने हेतु ऐसे शिविर अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने वृद्धजनों की प्रताड़ना के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों द्वारा भरण-पोषण न करने पर वृद्धजन न्यायालय की शरण ले सकते हैं।

एसडीओ अमित कुमार ने हिट एंड रन मामलों पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सड़क दुर्घटना के बाद वाहन चालक के फरार हो जाने की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के सात से दस दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन एसडीओ कार्यालय में जमा करें, जिसके उपरांत आश्रितों के खाते में राशि भेजी जाएगी।

अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष ने मध्यस्थता की प्रक्रिया को सरलता से समझाते हुए बताया कि यह तरीका विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अत्यंत प्रभावी है, जिसमें दोनों पक्ष बिना हार-जीत के आपसी सहमति से समाधान पाते हैं। पुलिस अधीक्षक ने पति-पत्नी अथवा पारिवारिक विवादों में सीधे एफआईआर दर्ज न कर महिला थाना में शिकायत देने की सलाह दी, जहां मध्यस्थता की प्रक्रिया के माध्यम से समाधान का प्रयास किया जाता है।

उपायुक्त डॉ. ताराचंद ने कहा कि मूल अधिकारों की जानकारी हर नागरिक के लिए आवश्यक है। जागरूकता से ही व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों और उपलब्ध सुविधाओं का बेहतर उपयोग कर सकता है। शिविर में जेएसएलपीएस की ओर से 874 महिला समूहों को 30 करोड़ 59 लाख रुपए तथा ग्राम संगठनों को 46 लाख 65 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। विभिन्न योजनाओं के तहत 11 लाभुकों को कंबल, 4 को सरसों बीज, 1 को गेहूं बीज, 10 को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृति पत्र, 5 को धोती-साड़ी, 1 लाभुक को बैसाखी तथा 2 लाभुकों को सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना का लाभ दिया गया।

जिले के विभिन्न प्रखंडों—किस्को, कुडू, सेन्हा, भंडरा, पेशरार और कैरो—में भी शिविर आयोजित किए गए। किस्को में 34, भंडरा में 70, कैरो में 28, सेन्हा में 34 तथा कुडू में 40 लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों एवं योजनाओं का वितरण किया गया। झालसा के निर्देशानुसार विभिन्न गांवों में जरूरतमंदों के बीच कंबल वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में निलेश तिर्की, रवि कुमार, पीएलवी गौतम लेनिन, रोहित कुमार, मंजू खाखा, प्रभु दयाल पासी, देवमणि कुमार, छाया देवी, अमित दुबे, अनीता कर्मकार, अनिमा एक्का, अजहर अहमद, इजहार अहमद सहित कई कर्मी उपस्थित रहे।

विशेष लोक अदालत सह मासिक लोक अदालत का आयोजन

151 मामलों का निष्पादन, 22 लाख से अधिक राजस्व की वसूली

झालसा, रांची के निर्देशानुसार व्यवहार न्यायालय परिसर में बिजली से जुड़े मामलों पर विशेष लोक अदालत सह मासिक लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसके लिए दो बेंचों का गठन किया गया—पहला बेंच (इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, सिविल अपील, क्रिमिनल अपील, एमएसीटी) एडीजे प्रथम श्री स्वयंभू की अध्यक्षता में तथा दूसरा बेंच (क्रिमिनल कंपाउंडेबल केस, एनआई एक्ट, एक्साइज केस) एसडीजेएम अमित कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में था।

विशेष लोक अदालत में बिजली संबंधी कुल 111 मामलों का निष्पादन किया गया और 7,46,000 रुपए की वसूली हुई। समग्र रूप से विशेष लोक अदालत सह मासिक लोक अदालत के दौरान कुल 151 मामलों का निष्पादन किया गया तथा 22,15,700 रुपए राजस्व की वसूली की गई।