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सुशासन दिवस के रूप में मनाई गई अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती

By Team Lohardaga live

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कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ता

लोहरदगा जिले के बूथ स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने आयोजित किए कार्यक्रम

लोहरदगा। भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रदेश के साथ-साथ लोहरदगा जिले में भी बूथ स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इसी क्रम में लोहरदगा जिला अध्यक्ष मनीर उरांव सदर प्रखंड अंतर्गत ग्राम कैमो में आयोजित सुशासन दिवस कार्यक्रम में उपस्थित हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष मनीर उरांव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का नेतृत्व केवल राजनीतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं था। उन्होंने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता का जो संदेश दिया, वह आज भी प्रेरणास्रोत है। वे एक कुशल वक्ता और महान कवि थे, जिन्होंने अपनी काव्य रचनाओं के माध्यम से भावनाओं और विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी और साहसिक निर्णयों से देश विकास के पथ पर आगे बढ़ा। झारखंड राज्य के निर्माता के रूप में भी अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका ऐतिहासिक रही। उन्होंने झारखंडियों और आंदोलनकारियों के सपने को साकार किया, जिसके परिणामस्वरूप आज झारखंड के लोग हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें समान अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

जिला महामंत्री पशुपति नाथ पारस ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने आदिवासी समाज के उत्थान के लिए विशेष योजनाएं बनाईं और एक स्वतंत्र मंत्रालय का गठन किया। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण एकलव्य विद्यालय हैं, जो आज लगभग सभी प्रखंडों में स्थापित हैं और आदिवासी बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ रहे हैं।

पवन तिग्गा ने कहा कि राज्य के लिए आंदोलन कई लोगों ने किया, लेकिन आंदोलन को सफल कर झारखंड राज्य का निर्माण करने में अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका निर्णायक रही। उन्होंने झारखंडियों की पीड़ा को समझा और गांव से शहर तथा शहर से विकसित शहर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया। इसी कारण उनके कार्य और व्यक्तित्व की चर्चा देश-विदेश में होती है।

कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष मनीर उरांव, जिला महामंत्री पशुपति नाथ पारस, पवन तिग्गा, ग्राम प्रधान प्रभु उरांव सहित रंजय उरांव, संजय उरांव, जम्मा उरांव, मनीष उरांव, संजय भगत, संजू उरांव, मनोज उरांव, बनारसी उरांव, मंगरू उरांव, सोमे उरांव, नरेश पहान, राजेश पहान, पुनीदास उरांव, बुधु उरांव, शुका उरांव, उषा कुमारी, करमी उराईन, सुरेश उरांव, सरिता उरांव, सुमंती कुमारी सहित अन्य ग्रामीण एवं पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित थे।