लोहरदगा में छठ महापर्व की धूम: श्रद्धा, भक्ति और उत्साह में डूबा पूरा जिला
By Teem Lohardaga live

लोहरदगा। सूर्य उपासना का महापर्व छठ जिले भर में बड़ी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। रविवार को जिले के सभी प्रमुख छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने पारंपरिक व्रत रखकर शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। घाटों पर भक्ति, आस्था और लोकसंगीत की गूंज से पूरा वातावरण दिव्यता से भर उठा।
जिले के प्रमुख छठ घाटों सीठियो छठ घाट, भक्सो कोयल नदी छठ घाट, शंख नदी छठ घाट, बड़ा तालाब छठ घाट और ठकुराइन तालाब छठ घाट में महिलाएं पारंपरिक वस्त्रों में सजधजकर पूजा सामग्री के साथ दिखीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग के लोगों में छठ को लेकर उत्साह देखने को मिला।
सूर्यास्त के समय जब व्रतधारी महिलाएं जल में खड़ी होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दे रही थीं, तो दृश्य अत्यंत मनमोहक हो उठा। घाटों पर छठ गीतों की गूंज और ढोल-मंजीरे की थाप से माहौल भक्तिमय बना रहा। सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पण के बाद लोगों ने एक-दूसरे को छठ पर्व की शुभकामनाएं दीं।
छठ पर्व को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी घाटों पर सुरक्षा और स्वच्छता की विशेष व्यवस्था की थी। पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मी और स्वयंसेवकों की टीम लगातार घाटों की निगरानी करती रही। नगर परिषद की ओर से सफाई, लाइटिंग, बैरिकेडिंग और पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई थी।
सांसद और डीसी ने लिया व्यवस्था का जायजा
पर्व की व्यवस्था और सुरक्षा तैयारियों का जायजा लेने के लिए लोहरदगा लोकसभा सांसद सुखदेव भगत और उपायुक्त डॉ. कुमार ताराचंद ने विभिन्न छठ घाटों का भ्रमण किया। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से बातचीत कर सुविधाओं की जानकारी ली और प्रशासनिक कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
छठ महापर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति और सामूहिकता का भी प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय, खरना, सांध्य अर्घ्य और उषा अर्घ्य जैसे अनुष्ठानों के माध्यम से सूर्यदेव और छठी मइया की आराधना की जाती है। यह पर्व पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और आत्मसंयम का भी संदेश देता है।
लोहरदगा के विभिन्न मोहल्लों और गांवों में भी लोगों ने अपने घरों के सामने छोटे तालाब, कुंड और कृत्रिम घाट बनाकर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालु परिवारों ने सामूहिक रूप से पारंपरिक छठ गीत गाए —
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...
इन गीतों की गूंज से पूरा वातावरण लोकभक्ति से सराबोर हो उठा।
कल सुबह उदयमान सूर्य को अर्घ्य
कल सुबह व्रतधारी महिलाएं उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर अपने 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारण करेंगी। इसके बाद श्रद्धालु परिवार प्रसाद ग्रहण कर पर्व का समापन करेंगे।
इस वर्ष लोहरदगा में छठ महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोक आस्था, स्वच्छता और एकजुटता का महोत्सव बन गया है।
