आदि फेस्ट में दिखी जनजातीय संस्कृति की रंगीन तस्वीर, कला और परंपरा से रूबरू हुए लोग
By Team orange hindi

विश्व आदिवासी दिवस पर जिला प्रशासन ने आयोजित किया #ADI-FEST, जल-जंगल-जमीन से जुड़ी संस्कृति को सहेजने पर जोर



लोहरदगा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से नया नगर भवन में ADI-FEST का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा, कला, जीवनशैली और विरासत को करीब से जानने-समझने का अवसर लोगों को मिला। कार्यक्रम का उद्घाटन लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उराँव ने किया।
कार्यक्रम में बोलते हुए विधायक डॉ. रामेश्वर उराँव ने कहा कि आदिवासी समाज की जीवनशैली सदियों से प्रकृति और जंगल से जुड़ी रही है। उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेश में रहने के बावजूद उनका जुड़ाव झारखंड की मिट्टी और यहां की संस्कृति से बना रहा। विधायक ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा की आत्मकथा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और विरासत को बेहतर ढंग से समझ सके।
उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। ऐसे में कृषि के क्षेत्र में बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने की जरूरत है।
आदिवासी समाज ने प्रकृति को बचाने की राह दिखाई : उपायुक्त
उपायुक्त संदीप कुमार मीना ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के हितों, अधिकारों और उनकी विशिष्ट पहचान की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज हमेशा से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीता आया है और जल, जंगल तथा जमीन के संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उपायुक्त ने इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से शुरू किए जा रहे ‘अकील एड़पा : बेहतर शिक्षा की ओर’ कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम को बेहतर बनाना है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिकता के साथ युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं को भी साथ लेकर चलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।
अधिकारों की जानकारी रखें, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं : एसपी
पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का भी अवसर है। उन्होंने अनुसूचित जनजाति समुदाय के संरक्षण के लिए मौजूद कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
एसपी ने कहा कि यदि किसी अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के साथ अन्याय होता है तो वह पुलिस के समक्ष शिकायत कर सकता है। उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों और कानून की जानकारी रखने तथा किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की।
अपनी जड़ों से जुड़कर ही बचेगी संस्कृति : जिला परिषद अध्यक्ष
जिला परिषद अध्यक्ष सुखदेव उराँव ने कहा कि आधुनिकता के दौर में नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी संस्कृति और परंपराओं से दूर होती जा रही है। ऐसे में अपनी जड़ों से जुड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मांदर, ढोल-नगाड़े, पारंपरिक गीत-संगीत और लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ जल, जंगल और जमीन से अपना रिश्ता भी मजबूत रखना होगा।
उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने प्रकृति और पारंपरिक संसाधनों के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की सीख दी है, जिसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।
बच्चों की प्रस्तुतियों में दिखी जनजातीय विरासत
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं पर आधारित रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत और जीवनशैली की झलक पेश की। प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
लाभुकों के बीच योजनाओं का मिला लाभ
आदि फेस्ट के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों और स्वीकृति पत्रों का वितरण भी किया गया। मुख्यमंत्री साइकिल योजना के तहत 10 छात्र-छात्राओं को साइकिल दी गई। पेशरार प्रखंड के पांच सामुदायिक समूहों को सामुदायिक वन पट्टा प्रदान किया गया, जबकि दो लाभुकों को मसना घेराबंदी की स्वीकृति दी गई।
JSLPS के दो लाभुकों को 61.80 लाख रुपये के रिवॉल्विंग फंड का चेक और दो लाभुकों को CIF फंड का चेक दिया गया। अबुआ आवास योजना के तहत चार लाभुकों का गृह प्रवेश कराया गया। इसके अलावा एक सेविका और एक सहायिका को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया। PMFME योजना के तहत एक लाभुक को 1.30 लाख रुपये का ऋण भी दिया गया।
स्टॉलों में नजर आई जनजातीय कला और स्थानीय उत्पादों की झलक
कार्यक्रम स्थल के समीप लगाए गए विभिन्न स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। उपायुक्त संदीप कुमार मीना, एसपी सादिक अनवर रिजवी समेत अन्य पदाधिकारियों ने स्टॉलों का निरीक्षण किया। यहां जनजातीय कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित गतिविधियों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त राज महेश्वरम, ITDA की परियोजना निदेशक सुषमा नीलम सोरेंग, अपर समाहर्ता जितेंद्र मुंडा, उप निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार, अनुमंडल पदाधिकारी अमित कुमार सहित अन्य पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद रहे।