करमा मिलन समारोह में झारखंडी संस्कृति के रंग, बच्चों ने प्रस्तुत किए पारंपरिक नृत्य-गीत
By Team orangehindi

प्रकृति प्रेम और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का संदेश, करम-धरम की कथा से बच्चों को मिली अच्छे कर्मों की सीख
लोहरदगा। झारखंड की समृद्ध लोकपरंपरा, प्रकृति प्रेम और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के प्रतीक करमा पर्व के अवसर पर पीएम श्री राजकीयकृत मध्य विद्यालय, नवाडी पाड़ा में करमा मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत कर झारखंड की सांस्कृतिक विरासत की मनमोहक झलक पेश की।
समारोह में मुख्य अतिथि शिक्षक सुकरा उरांव का विद्यालय परिवार की ओर से पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार परछन कर स्वागत किया गया। उन्हें पगड़ी बांधकर और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने करमा पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए करमा और धरमा की कथा तथा करम डाली की पूजा की परंपरा के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बच्चों को सदैव सच बोलने, छल-प्रपंच से दूर रहने और अच्छे कर्म करने की सीख दी। उन्होंने विद्यालय में हो रहे सकारात्मक बदलावों की सराहना करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे सांस्कृतिक आयोजन आवश्यक हैं। इस दौरान उन्होंने करम गीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
प्रधानाध्यापक अरुण राम ने कहा कि करमा पर्व में करम डाली की पूजा की जाती है और अनाज के कोमल पौधों को जवा के रूप में विकसित कर पूजा में शामिल किया जाता है। यह परंपरा प्रकृति के प्रति झारखंडवासियों के प्रेम और सम्मान को दर्शाती है। विज्ञान शिक्षक राहुल कुमार ने स्वागत भाषण में करमा पर्व को भाई-बहन के स्नेह, प्रेम, भाईचारे और प्रकृति संरक्षण का संदेशवाहक बताया।