सीईसी की नियुक्ति में CJI की भूमिका बहाली की मांग, दिल्ली में INDIA ब्लॉक का लोकतंत्र मार्च
By Team orangehindi

धीरज प्रसाद साहू बोले—निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी; झारखंड के कई कांग्रेस नेता दिल्ली रवाना
रांची/नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की भूमिका बहाल करने की मांग को लेकर INDIA ब्लॉक सोमवार को नई दिल्ली में ‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ आयोजित करेगा। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए झारखंड के कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता रविवार देर रात दिल्ली रवाना हुए।
दिल्ली जाने वालों में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, बन्ना गुप्ता, झारखंड प्रदेश कांग्रेस महासचिव डॉ. अजय शाहदेव, विधायक भूषण बाड़ा, विधायक अनूप सिंह, वरिष्ठ नेता सच्चिदानंद चौधरी और ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष निशांत प्रकाश जायसवाल शामिल हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, लोकतंत्र मार्च सोमवार दोपहर तीन बजे कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड जंक्शन से शुरू होगा। इसके बाद विपक्षी गठबंधन के 10 नेताओं का प्रतिनिधिमंडल शाम चार बजे से साढ़े चार बजे के बीच भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में सीजेआई की भूमिका बहाल करने सहित निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाएगा।
पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि निर्वाचन आयोग भारतीय लोकतंत्र की महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है और उसकी निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कायम रहना जरूरी है। उन्होंने कहा, “निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और संवैधानिक सहभागिता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता मजबूत हो।”
गौरतलब है कि वर्ष 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इस व्यवस्था में भारत के मुख्य न्यायाधीश सदस्य नहीं हैं।
INDIA ब्लॉक इस चयन प्रक्रिया में बदलाव की मांग कर रहा है। विपक्षी दलों का तर्क है कि नियुक्ति समिति में सीजेआई की सहभागिता से निष्पक्षता, संस्थागत संतुलन और निर्वाचन आयोग के प्रति जनविश्वास को मजबूती मिल सकती है। प्रस्तावित मार्च को इसी मांग के समर्थन में विपक्ष की एकजुटता प्रदर्शित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।