Orange hindi lohardaga live

संसद परिसर में आदिवासी पहचान के मुद्दे पर सांसद सुखदेव भगत का प्रदर्शन

By Team orange hindi

political
संसद परिसर में आदिवासी पहचान के मुद्दे पर सांसद सुखदेव भगत का प्रदर्शन

अमित शाह के ‘वनवासी’ संबोधन पर जताई आपत्ति, कहा—आदिवासी हमारी संवैधानिक और ऐतिहासिक पहचान

नई दिल्ली/लोहरदगा। आदिवासी समाज की पहचान और अस्मिता के सवाल को लेकर लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत ने सोमवार को संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कथित तौर पर आदिवासियों के लिए ‘वनवासी’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताते हुए भगत ने कहा कि आदिवासी समाज को किसी सीमित पहचान के दायरे में नहीं बांधा जा सकता।

प्रदर्शन के दौरान सांसद ने कहा कि आदिवासी केवल एक संबोधन नहीं, बल्कि देश के इतिहास, संविधान और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण पहचान है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान और अधिकारों को लेकर लंबे समय से संघर्ष करता आया है और इस पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए।

‘पहचान हम तय करेंगे’

सुखदेव भगत ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान स्वयं आदिवासी तय करेंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी को ‘वनवासी’ कहकर उसकी पहचान को केवल जंगल से जोड़ना उचित नहीं है। उनके अनुसार आदिवासी समाज देश की सभ्यता, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा में महत्वपूर्ण योगदान देता आया है।

विश्व आदिवासी दिवस का किया उल्लेख

सांसद ने 9 अगस्त को मनाए गए विश्व आदिवासी दिवस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित यह दिवस आदिवासी समुदायों की पहचान, अधिकार, संस्कृति, परंपरा और उनके संघर्षों को सम्मान देने का अवसर है। ऐसे समय में आदिवासी समाज की मूल पहचान को लेकर किसी भी तरह की टिप्पणी स्वाभाविक रूप से चिंता का विषय बनती है।

जल-जंगल-जमीन और संस्कृति की रक्षा पर जोर

भगत ने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक अधिकार भी उसकी अस्मिता के अभिन्न हिस्से हैं। इनसे जुड़े सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकारों और सम्मान की लड़ाई लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी जारी रखेगा।

संसद परिसर में प्रदर्शन के जरिए उठाई आवाज

सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि आदिवासी समाज की संवैधानिक और ऐतिहासिक पहचान का सम्मान होना चाहिए। संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार से आदिवासी समुदाय की भावनाओं और उसकी पहचान को सम्मान देने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने आदिवासी अस्मिता से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने का संदेश दिया।

और पढ़ें