मुख्य सड़कों के किनारे सूखे पेड़ बने खतरे का सबब
By Team orangehindi

मुख्य सड़कों के किनारे सूखे पेड़ बने खतरे का सबब
लोहरदगा। जिले के प्रमुख मार्गों के किनारे खड़े सूखे
और जर्जर पेड़ इन दिनों राहगीरों के लिए खतरे का कारण बने हुए हैं। लोहरदगा से कुडू, लोहरदगा से भंडरा तथा लोहरदगा से सेन्हा जाने वाले मुख्य मार्गों के किनारे कई ऐसे पेड़ दिखाई दे रहे हैं, जिनकी अधिकांश डालियां सूख चुकी हैं। कई पेड़ों के तने भी कमजोर और क्षतिग्रस्त नजर आते हैं। ऐसे में तेज हवा और बारिश के दौरान इनके गिरने की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सूखे पेड़ों की कमजोर डालियां समय-समय पर टूटकर सड़क किनारे गिरती रहती हैं। फिलहाल ये पेड़ सड़क से गुजरने वाले वाहनों और पैदल राहगीरों के लिए संभावित खतरा बने हुए हैं। तस्वीरों में भी कई पेड़ों की बड़ी-बड़ी सूखी शाखाएं सड़क की ओर झुकी हुई दिखाई दे रही हैं।
इन मार्गों पर कुछ स्थानों पर बिजली के तार भी सूखे पेड़ों और उनकी शाखाओं के आसपास से गुजर रहे हैं। आंधी के दौरान यदि कोई भारी शाखा टूटकर बिजली तारों पर गिरती है तो विद्युत आपूर्ति बाधित होने के साथ-साथ दुर्घटना की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। सड़क से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
बारिश के दौरान तेज हवा और बारिश के बीच कमजोर पेड़ों के गिरने की आशंका सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। खासकर मुख्य मार्ग होने के कारण इन सड़कों पर दिनभर वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सड़क किनारे खड़े जर्जर पेड़ों को केवल पर्यावरणीय विषय के रूप में नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले के तौर पर भी देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से इन पेड़ों का सर्वे कराने और सड़क किनारे मौजूद सूखे एवं खतरनाक पेड़ों की पहचान कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। जहां पेड़ बिजली लाइनों के समीप हैं, वहां बिजली विभाग के साथ समन्वय कर सुरक्षा उपाय किए जाने की भी जरूरत बताई गई है।
लोगों का कहना है कि किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते खतरनाक पेड़ों की जांच और आवश्यक छंटाई अथवा हटाने की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। संबंधित सड़क प्राधिकरण एवं एनएचएआई के अधिकार क्षेत्र में आने वाले हिस्सों में नियमानुसार कार्रवाई होने से संभावित हादसे को टाला जा सकता है।