अच्छाई की जीत का पर्व: दशहरा
By Team Lohardaga Live

लोहरदगा। आज देशभर में दशहरा का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व अच्छाई की जीत और बुराई के अंत का प्रतीक है। दशहरा हमें सिखाता है कि धर्म और सत्य का मार्ग ही मानव जीवन का सच्चा पथ है और अंततः जीत उसी की होती है जो न्याय और सदाचार का पालन करता है।
दशहरा का धार्मिक महत्व
दशहरा का सबसे प्रमुख धार्मिक आधार रामायण से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। रावण ज्ञान और शक्ति से सम्पन्न था, लेकिन उसका अहंकार और अधर्म उसे पतन की ओर ले गया। भगवान राम ने धर्म और सत्य की स्थापना के लिए रावण का वध किया और इस प्रकार बुराई का अंत कर अच्छाई की जीत सुनिश्चित की।
दशहरा की परंपराएं
दशहरा पर कई परंपराएं भी निभाई जाती हैं। देशभर में जगह-जगह रामलीला का आयोजन किया जाता है, जिसमें राम-रावण युद्ध का मंचन होता है। इस दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। यह बुराई को समाप्त करने और अच्छाई के मार्ग पर चलने का प्रतीक है।
दशहरा का संदेश
दशहरा हमें यह संदेश देता है कि चाहे बुराई कितनी भी बलवान क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है। सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। यह त्योहार हमें अपने जीवन में मौजूद बुराइयों जैसे अहंकार, क्रोध, लोभ और अनैतिकता को दूर करने की प्रेरणा भी देता है।
आज के दौर में दशहरा का महत्व
आज के दौर में दशहरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को नैतिकता और मानवीय मूल्यों की याद दिलाने वाला पर्व बन चुका है। यह लोगों को एकता, मेलजोल और सामाजिक समरसता का अवसर प्रदान करता है।
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