लोहरदगा के जामुन डिपा टाना टोली में पारंपरिक बिशु सेंदरा एवं धरती पूजा का भव्य आयोजन, 34 पड़हा से जुटे हजारों लोग
By Team Lohardaga live

पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक एकता और आदिवासी पहचान को मजबूत करने का लिया संकल्प
लोहरदगा। जिला राजी पड़हा व्यवस्था लोहरदगा के बैनर तले सेन्हा प्रखंड के झालजमीरा स्थित जामुन डिपा टाना टोली में पारंपरिक बिशु सेंदरा एवं धरती पूजा कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के 34 पड़हा से बड़ी संख्या में पाहन, पुजार, महतो, जेठरैयत एवं आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाज, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
सामूहिक पूजा-अर्चना और शोभायात्रा से गूंजा क्षेत्र
कार्यक्रम की शुरुआत सात पड़हा झालजमीरा के पाहन विकास पाहन, पुजार अमित उरांव एवं अन्य पारंपरिक अगुवाओं के नेतृत्व में सामूहिक पूजा-अर्चना के साथ हुई। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की गूंज, गज एवं पड़हा झंडों के साथ निकाली गई शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को उत्साह और श्रद्धा से भर दिया। कार्यक्रम स्थल के समीप मैदान में विधिवत झंडा गाड़ी की रस्म पूरी की गई। इसके बाद मोर पंख से सुसज्जित झाईल स्थापित कर धरती पूजा की गई ताकि आयोजन शांतिपूर्ण एवं मंगलमय ढंग से संपन्न हो सके।
आदिवासी समाज की एकता और परंपरा को मजबूत करने पर जोर
जिला राजी पड़हा व्यवस्था के जिला बेल लक्ष्मी नारायण भगत ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की एकता और पारंपरिक व्यवस्था को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के बाद आपसी सहमति और विचार-विमर्श से समाज को सही दिशा देने के लिए सामाजिक कानून और व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।
भाषा, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था पर हुई विस्तृत चर्चा
सम्मेलन में पाहन-पुजार एवं महतो की भूमिका, भाषा-लिपि और शिक्षा, आदिवासी धर्म-संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था, पारंपरिक नेगाचार और शादी-विवाह जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी संस्कृति और भाषा को बचाए रखना बड़ी चुनौती है, लेकिन समाज की जागरूकता और एकजुटता से इसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
अपनी मातृभाषा और संस्कृति पर गर्व करें : रोहित उरांव
कार्यक्रम में शामिल लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव के पुत्र सह युवा समाजसेवी रोहित उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपरा से होती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अन्य राज्य अपनी भाषा और संस्कृति के कारण पहचाने जाते हैं, उसी प्रकार आदिवासी समाज को भी अपनी मातृभाषा और परंपरा पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में वे समाज के हर मुद्दे पर मजबूती से खड़े रहेंगे और अगली बार इस प्रकार के कार्यक्रम में अपनी क्षेत्रीय भाषा में संबोधित करेंगे।
नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का आह्वान
जिला परिषद अध्यक्ष सुखदेव उरांव ने कहा कि पड़हा व्यवस्था आदिवासी समाज की रीढ़ है। इसे बचाकर रखना और नई पीढ़ी तक इसकी परंपराओं को पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जुड़ने का आह्वान किया।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
बैठक में मुख्य रूप से जिला बेल लक्ष्मी नारायण भगत, देवान वीरेंद्र उरांव, कोटवार डोमना उरांव, भंडारी गोसाई भगत, उप बेल बुद्धेश्वर उरांव, उप देवान बजरंग उरांव, उप भंडारी नारायण उरांव, उप कोटवार सुखदेव उरांव, जोंक बेल मंजन उरांव, मीडिया प्रभारी जगदीप भगत, सुरेंद्र उरांव, राजू बाखला, मधुसूदन टाना भगत, बिरी टाना भगत, रंजन उरांव, संजीव भगत, अरविंद उरांव, चैतू उरांव, सोमदेव उरांव, सोमे उरांव, बिरसा उरांव, लालदेव उरांव, विधायक प्रतिनिधि निशिथ जायसवाल, विधायक के पर्सनल असिस्टेंट संजय दुबे, युवा नेता विशाल डुंगडुंग, जतरू उरांव, कैलाश उरांव सहित विभिन्न गांवों से पहुंचे जिला राजी पड़हा व्यवस्था के पदाधिकारी, पाहन, पुजार, महतो, गौरव एवं जेठरैयत सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।
