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हाटी ग्रामसभा का फैसला, धर्मांतरण विरोधी बोर्ड लगाए; पादरी-पास्टर के प्रवेश पर रोक का निर्णय

By Team Lohardaga live

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प्रार्थना करते आदिवासी संगठन के पदाधिकारी व ग्रामीण

पेसा कानून का हवाला देते हुए ग्रामसभा ने पारित किया प्रस्ताव, आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का लिया संकल्प

लोहरदगा। भंडरा प्रखंड के हाटी गांव में गुरुवार को ग्रामसभा की ओर से धर्मांतरण के विरोध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर गांव की सीमा पर सूचना बोर्ड लगाए गए, जिनमें गांव में ईसाई धर्म के पादरी एवं पास्टर के प्रवेश तथा धर्मांतरण से जुड़े बाहरी व्यक्तियों की गतिविधियों पर रोक लगाए जाने की बात अंकित की गई है। बोर्ड में पेसा (पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम का भी उल्लेख किया गया है।

ग्रामसभा के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह निर्णय आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज, धार्मिक आस्था और सामाजिक पहचान के संरक्षण के उद्देश्य से लिया गया है। उनका कहना था कि ग्रामसभा अपने पारंपरिक अधिकारों के तहत गांव की सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में उपस्थित आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज अब अपनी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर अधिक जागरूक और संगठित हो रहा है। उन्होंने कहा कि समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा लोगों को अपनी विरासत के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी संगठन से जुड़े पदाधिकारी व ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामसभा के सदस्यों ने कहा कि गांव में लगाए गए सूचना बोर्ड के माध्यम से ग्रामसभा के निर्णय से आम लोगों को अवगत कराया जा रहा है।