भारत की आवाज बनी विश्व का संकल्प, 27 नवंबर को होगा बाल विवाह विरोधी अंतरराष्ट्रीय दिवस
By Team orangehindi

UN के ऐतिहासिक फैसले का लोहरदगा में स्वागत, जेआरसी के प्रयासों को मिली वैश्विक पहचान
लोहरदगा। बाल विवाह के खिलाफ भारत से उठी आवाज अब वैश्विक संकल्प बन गई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 27 नवंबर को ‘बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह की समाप्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस’ घोषित किए जाने का लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान ने स्वागत किया है। संस्था ने इसे जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) और उसके सहयोगी संगठनों के वर्षों के जमीनी संघर्ष की वैश्विक मान्यता बताया।
शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में संस्था के प्रोग्राम मैनेजर विक्रम कुमार ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र की घोषणा जश्न का अवसर जरूर है, लेकिन हमारी असली मंजिल तब होगी, जब हर बच्चे को बाल विवाह से मुक्त सुरक्षित बचपन मिलेगा।”
उन्होंने बताया कि लोहरदगा में सरकार और प्रशासन के सहयोग से 4,247 बाल विवाह समझाइश एवं हस्तक्षेप के माध्यम से रोके गए हैं। स्कूलों, पंचायतों और गांवों में जागरूकता अभियान चलाने के साथ कमजोर परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, स्कूल छोड़ चुके बच्चों का पुनः नामांकन कराने तथा शिक्षकों और धर्मगुरुओं को अभियान से जोड़ने का काम किया जा रहा है।
जेआरसी के संस्थापक भुवन ऋभु की पहल के बाद सिएरा लियोन ने भारत समेत करीब 50 देशों के समर्थन से संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश किया। 4 सितंबर 2026 को प्रस्ताव पारित होने के साथ 27 नवंबर को वैश्विक दिवस घोषित किया गया।
जेआरसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ देश के 782 जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है और अब तक 5.50 लाख से अधिक बाल विवाह रोकने में सहयोग का दावा करता है।
संस्था ने कहा कि यह सफलता तभी सार्थक होगी, जब बाल विवाह मुक्त भारत के साथ बाल विवाह मुक्त दुनिया का सपना भी साकार हो।













