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मैना बगीचा को फिर हरा-भरा करने की पहल, विश्व आदिवासी दिवस पर लगाए गए 50 फलदार पौधे

By Team orange hindi

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मैना बगीचा को फिर हरा-भरा करने की पहल, विश्व आदिवासी दिवस पर लगाए गए 50 फलदार पौधे

नवयुवक सरना समिति ने ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में उठाया कदम

लोहरदगा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अमर शहीद वीर बुधू भगत प्रतिमा स्थल स्थित ऐतिहासिक मैना बगीचा में नवयुवक सरना समिति की ओर से वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कभी फलदार वृक्षों से गुलजार रहने वाला मैना बगीचा आज अपने अस्तित्व को बचाने की चुनौती से जूझ रहा है। ऐसे में समिति की ओर से शुरू की गई यह पहल केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक स्थल को फिर से हरियाली से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

कार्यक्रम के दौरान समिति के सदस्यों ने मैना बगीचा परिसर में 50 फलदार पौधे लगाए। समिति के सदस्यों ने बताया कि वर्षों पहले यह स्थान हरियाली और फलदार वृक्षों से भरा रहता था और स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। समय के साथ यहां हरियाली कम होती गई, जिसे देखते हुए परिसर को फिर से हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया गया है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ विरासत बचाने का संदेश

वृक्षारोपण कार्यक्रम के जरिए समिति ने पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण का भी संदेश दिया। समिति का मानना है कि मैना बगीचा केवल एक स्थान नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास और अमर शहीद वीर बुधू भगत की स्मृति से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। ऐसे में इसकी हरियाली और प्राकृतिक स्वरूप को बचाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

करम पूजा आयोजन में भी सक्रिय रही है समिति

नवयुवक सरना समिति पिछले कई वर्षों से मैना बगीचा परिसर में करम पूजा का भव्य आयोजन करती आ रही है। इस बार विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर समिति ने सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी अभियान का हिस्सा बनाया।

कार्यक्रम में अभिनव सिद्धार्थ भगत, मनोज सोन तिर्की, साजिद अहमद, मनोज भगत, सुकरा उरांव, सुधीर टोप्पो, सत्यजीत सिंह, दयानंद लकड़ा, बीगू उरांव, बिनोद उरांव, विनय उरांव, संदीप उरांव, विनोद लकड़ा, लाल उरांव, लच्छू उरांव, शंकर उरांव, राखी उरांव, पूजा उरांव, पूर्णिमा उरांव, फागु उरांव, सुषमा उरांव, सुभाष उरांव, अनुज खाखा सहित कई लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

समिति की पहल से स्थानीय लोगों में भी मैना बगीचा के संरक्षण और इसे दोबारा हरित स्थल के रूप में विकसित करने को लेकर उम्मीद जगी है।

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