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एमएमडीआर संशोधन पर झामुमो का विरोध राजनीतिक भ्रम फैलाने का प्रयास : मनीर उरांव

By Team orangehindi

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एमएमडीआर संशोधन पर झामुमो का विरोध राजनीतिक भ्रम फैलाने का प्रयास : मनीर उरांव

खनिज राजस्व, डीएमएफ और अवैध खनन पर राज्य सरकार से मांगा हिसाब; कहा- खनिज संपदा का लाभ जनता तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी

लोहरदगा। एमएमडीआर संशोधन को लेकर झामुमो के विरोध पर भाजपा नेता मनीर उरांव ने सवाल उठाते हुए कहा कि झामुमो को केंद्र सरकार पर आरोप लगाने से पहले झारखंड में खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व और अवैध खनन पर अपनी सरकार के कार्यकाल का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र का संशोधन झारखंड के खनिज अधिकार छीनने वाला नहीं, बल्कि खनन व्यवस्था में पारदर्शिता, समानता, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया कदम है।

मनीर उरांव ने कहा कि राज्य सरकार को खनिज नीति के प्रावधानों पर तथ्यात्मक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि पिछले वर्षों में खनिज संपदा से राज्य को कितना राजस्व प्राप्त हुआ, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर कितना खर्च हुआ, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की राशि का जिला-वार कितना उपयोग हुआ तथा अवैध खनन और अवैध परिवहन के खिलाफ कितनी कार्रवाई की गई।

उन्होंने कहा कि एमएमडीआर संशोधन को झारखंड का खनिज अधिकार छीनने वाला कानून बताना तथ्यों को आधा-अधूरा प्रस्तुत करना है। उनके अनुसार केंद्र की ओर से स्पष्ट किया गया है कि रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, डीएमएफ, एनएमईटी और जीएसटी सहित मौजूदा खनन भुगतानों में राज्यों की हिस्सेदारी बनी रहेगी। लघु खनिजों पर राज्यों की मौजूदा शक्तियां भी प्रभावित नहीं होती हैं।

मनीर उरांव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार खनिज नीति के वास्तविक प्रावधानों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक भ्रम पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड में विकास का लाभ आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचना जरूरी है। केवल केंद्र की नीतियों के विरोध में आंदोलन करने से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और रोजगार की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

उन्होंने राज्य सरकार से अवैध खनन, खनिज चोरी, अवैध परिवहन और खनन प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं पर ठोस जवाब देने की मांग की। कहा कि झारखंड की जनता राजनीतिक टकराव के बजाय खनिज संपदा से उद्योग, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास का लाभ चाहती है।

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