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मैना बगीचा में करमा की उमंग, प्रकृति संरक्षण का संदेश

By Pritam

Culture
मैना बगीचा में करमा की उमंग, प्रकृति संरक्षण का संदेश

नव युवक सरना समिति के आयोजन में करम डाल की पूजा, सांसद सुखदेव भगत ने कहा—करमा सिर्फ पर्व नहीं, प्रकृति और सामुदायिक जीवन से जुड़ी परंपरा

मैना बगीचा में करमा की उमंग, प्रकृति संरक्षण का संदेश
मैना बगीचा में करमा की उमंग, प्रकृति संरक्षण का संदेश
मैना बगीचा में करमा की उमंग, प्रकृति संरक्षण का संदेश

लोहरदगा। मैना बगीचा में नव युवक सरना समिति के तत्वावधान में करमा पूजनोत्सव का आयोजन पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। करमा पर्व को लेकर क्षेत्र में दिनभर उत्सव का माहौल रहा। शाम होते ही बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और श्रद्धालु पूजा स्थल पर जुटे और विधि-विधान के साथ करम डाल की पूजा-अर्चना की।

कार्यक्रम में लोहरदगा लोकसभा सांसद सुखदेव भगत भी शामिल हुए। उन्होंने करमा पर्व को आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के साथ-साथ प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा पर्व बताया। उन्होंने कहा कि करमा केवल एक समुदाय या समाज तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति श्रद्धा, समर्पण और संरक्षण की भावना का संदेश देता है।

सांसद ने कहा कि करम डाल के प्रति लोगों की आस्था यह बताती है कि हमारे पूर्वज प्रकृति और उसके महत्व को कितनी गहराई से समझते थे। प्राणवायु देने वाले वृक्षों के प्रति श्रद्धा और उन्हें पूजा से जोड़ना पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करता है। करमा पर्व भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक रिश्तों की मजबूती के साथ सामुदायिक एकजुटता का भी प्रतीक है।

करमा पर्व झारखंड की आदिवासी और ग्रामीण संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। करम वृक्ष की डाल को अखाड़े या पूजा स्थल पर स्थापित कर उसकी पूजा की जाती है। महिलाएं और युवतियां पारंपरिक गीत-संगीत के साथ करमा की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर रातभर करमा गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलता है। यह पर्व प्रकृति, कृषि, सामुदायिक जीवन और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी लोक परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम भी है।

मैना बगीचा में आयोजित कार्यक्रम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच श्रद्धालुओं ने करम डाल की पूजा कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग, प्रशासनिक पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां मौजूद रहीं। पूजा के दौरान पारंपरिक माहौल और सांस्कृतिक रंग ने पूरे परिसर को उत्सवमय बना दिया।अगर आप चाहें तो इसमें समिति के अध्यक्ष/सचिव का बयान और करमा पूजा में हुए गीत-संगीत व नृत्य कार्यक्रम का विवरण जोड़कर इसे और प्रभावशाली स्थानीय खबर के रूप में भी बनाया जा सकता है।

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