लोहरदगा में खरीफ कर्मशाला आयोजित, 500 किसानों को दी गई वैज्ञानिक खेती की जानकारी
By Team Lohardaga live

बदलते मौसम और अल-नीनो की चुनौती से निपटने को कृषि विभाग की तैयारी तेज
लोहरदगा। बदलते मौसम और अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को जागरूक एवं तैयार करने के उद्देश्य से जिला कृषि विभाग, लोहरदगा द्वारा शुक्रवार को एक दिवसीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त संदीप कुमार मीना ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता किसानों को हर परिस्थिति में सुरक्षित रखना तथा उन्हें समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष अल-नीनो के प्रभाव के कारण मानसून प्रभावित होने और सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में किसानों को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों की खेती पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कृषि विभाग को निर्देश दिया कि खरीफ फसल के बीज उपलब्ध होते ही किसानों के बीच समय पर वितरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही किसानों को फसल के साथ इंटरक्रॉपिंग अपनाने और सब्जी उत्पादन को प्राथमिकता देने की सलाह दी। उपायुक्त ने किसानों से बिरसा फसल बीमा योजना के तहत अनिवार्य रूप से निबंधन कराने की अपील करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा या मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में यह योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करेगी।
कन्वर्जन पर विशेष फोकस का निर्देश
उपायुक्त ने कृषि विभाग को कन्वर्जन आधारित योजनाओं पर अधिक कार्य करने का निर्देश देते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की बात कही ताकि विपरीत परिस्थितियों में किसानों को त्वरित राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह को अपनाकर किसान बदलते मौसम की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
कम पानी में खेती की तकनीक अपनाने की सलाह
जिला कृषि पदाधिकारी कालेन खलखो ने खरीफ मौसम की तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस), लाइन सोइंग तकनीक और कम अवधि वाले धान की खेती अपनानी चाहिए। इससे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन संभव है।
उन्होंने किसानों को मड़ुआ, ज्वार, बाजरा जैसी मोटे अनाज वाली फसलों तथा दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी। साथ ही खेत की मिट्टी, नमी और जल उपलब्धता के अनुसार फसल चयन करने पर बल दिया।
आधुनिक तकनीक और जैविक खेती पर जोर
कार्यशाला में किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीज, जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा जल संरक्षण की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने तथा बदलते मौसम में खेती को सुरक्षित रखने के उपाय बताए।
पशुपालन एवं ढैंचा खेती की जानकारी दी गई
जिला पशुपालन पदाधिकारी ने किसानों को पशुपालन से जुड़ी योजनाओं, पशुओं में होने वाली मौसमी बीमारियों तथा उनके बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने समय-समय पर पशुओं का टीकाकरण कराने और स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।
कृषि विज्ञान केंद्र की वरीय वैज्ञानिक द्वारा किसानों के बीच मक्का एवं ढैंचा बीज का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि ढैंचा का उपयोग हरी खाद के रूप में किया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता बढ़ती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
विभिन्न विभागों ने दी योजनाओं की जानकारी
कार्यक्रम में उद्यान विभाग द्वारा फल एवं सब्जी उत्पादन से संबंधित योजनाओं की जानकारी दी गई, जबकि सहकारिता विभाग ने किसानों को ऋण, बीज एवं अन्य सुविधाओं से संबंधित योजनाओं से अवगत कराया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनकर उनके समाधान के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने इस प्रकार की कार्यशालाओं को उपयोगी बताते हुए नियमित रूप से आयोजन करने की मांग की।
इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष सुखदेव उराँव, उप विकास आयुक्त सुषमा नीलम सोरेंग, जिला गव्य विकास पदाधिकारी वशिष्ठ सिंह, जिला सहकारिता पदाधिकारी विजय प्रताप तिर्की, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी मोहितोष पांडेय, जिला उद्यान पदाधिकारी सौरभ लोहानी, डीडीएम नाबार्ड, कृषि वैज्ञानिक, जेएसएलपीएस प्रतिनिधि, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, कृषक मित्र, जनसेवक एवं 500 से अधिक किसान उपस्थित थे।
