दीपावली की रौनक से जगमगा रहा लोहरदगा, कुम्हार समाज के हाथों बन रहे हैं पारंपरिक दीए
By Team lohardaga live

शहर से लेकर गांव के बाजार हाटो मे बिकने लगे मिट्टी के दीये और खिलोने

लोहरदगा। दीपावली के आगमन के साथ ही लोहरदगा जिले में चारों ओर उत्साह का माहौल है। लोग अपने घरों की सफाई और सजावट में व्यस्त हैं, वहीं जिले का कुम्हार समाज पूरी लगन से मिट्टी के दीए बनाने में जुटा हुआ है। शहर से लेकर गांव के बाजार हाटो मे बिकने लगे मिट्टी के दीये और खिलोने, जहां खरीदारों की भीड़ भी उमड़ने लगी हैं।
*बढ़ रही पारम्परिक दियो की मांग*
जिले के माटी के कारीगरों द्वारा तैयार किए जा रहे सुंदर-सुंदर दीए न केवल लोहरदगा बल्कि दूसरे जिलों में भी इन पारंपरिक दीयों की मांग लगातार बढ़ रही है।
*लगातार वारिश से कारीगरों की बढ़ी परेशानी*
कुम्हार समाज के लोगों का कहना है कि इस बार लगातार हुई बारिश के कारण दीया निर्माण में कुछ देरी जरूर हुई, लेकिन अब मौसम साफ होते ही वे दिन-रात काम कर रहे हैं ताकि समय पर सभी ऑर्डर पूरे हो सकें।
*मिट्टी से निर्मित समान बिक्री के लिए तैयार*
दीयों के अलावा कारीगरों ने मिट्टी के बर्तन, ग्वालिन, शेर, हाथी, घोड़ा, चिड़िया, और घरौंदे जैसे सजावटी सामान भी तैयार किए हैं, जो दीपोत्सव के बाजारों में बिक्री के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
*कुम्हार समाज ने किया स्वदेशी अपनाने की अपील*
कुम्हार समाज ने जिलेवासियों से स्वदेशी अपनाने और चाइनीज़ वस्तुओं का बहिष्कार करने की अपील की है। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर बने मिट्टी के दीए न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि यह परंपरा और संस्कृति को भी जीवित रखते हैं।
*पारंपरिक दीयो की
अच्छी बिक्री की हैं उम्मीदें*
इस बार कुम्हार समाज को उम्मीद है कि बाजार में उनके बनाए पारंपरिक दीयों की बिक्री अच्छी रहेगी और जिले की मिट्टी से बनी यह रौशनी घरों को जगमगाएगी।
