लोहरदगा: पेसा नियमावली 2025 पर कार्यशाला आयोजित, पारंपरिक अगुआ जुटे
By Team orangehindi

लोहरदगा। स्थानीय झखरा कुम्बा सभागार में रविवार को 'झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2025' के तहत लागू (पेसा) नियमावली पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर के महतो, पहान, पूजार और आदिवासी समाज के प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
ग्राम सभा और पारंपरिक स्वशासन को मिलेगी मजबूती
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रोहित उरांव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू पेसा नियमावली 2025 से आदिवासी समाज की सदियों पुरानी रूढ़िजन्य परंपराओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को कानूनी मजबूती मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम सभा का संचालन गांव के ही पारंपरिक अगुआओं और बुद्धिजीवियों के माध्यम से होगा।
पेसा कानून देता है त्रिस्तरीय संरक्षण
राष्ट्रीय महासचिव जालेश्वर उरांव और केंद्रीय कोषाध्यक्ष बिरसा उरांव ने पेसा कानून की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह व्यवस्था ग्राम सभा को तीन प्रमुख स्तरों पर संरक्षण प्रदान करती है:
सामाजिक संरक्षण: पारंपरिक सामाजिक ढांचे को सुरक्षित रखना।
धार्मिक संरक्षण: पूजा-स्थल और धार्मिक मान्यताओं का बचाव।
रूढ़िजन्य संरक्षण: सदियों से चली आ रही स्वशासन व्यवस्था और प्रथाओं को कानूनी मान्यता।
वक्ताओं ने सीएनटी (CNT) एक्ट के तहत आदिवासी जमीनों की सुरक्षा और समाज के लिए लिखित धर्म कोड की जरूरत पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक रूप से ढोल-डुगडुगी, शंख या घंटा बजाकर ग्रामीणों को ग्राम सभा के लिए आमंत्रित किया जाता है और बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान ही करते हैं।
बिना निमंत्रण पहुंचे देवान पर हंगामा करने का आरोप
सौहार्दपूर्ण माहौल में चल रही कार्यशाला के दौरान उस समय व्यवधान उत्पन्न हो गया जब पारंपरिक स्वशासन पड़हा व्यवस्था के देवान संजीव भगत ने मंच पर चढ़कर हंगामा शुरू कर दिया। आयोजकों (राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा) ने आरोप लगाया कि संजीव भगत बिना निमंत्रण और बिना अनुमति के मंच पर आए और कार्यशाला को बाधित करने का प्रयास किया।
वरिष्ठ सामाजिक प्रतिनिधि रहे मौजूद
तनाव के बावजूद कार्यशाला संपन्न हुई। इस दौरान मंच संचालन जिला समिति के अध्यक्ष द्वारा किया गया। मौके पर राष्ट्रीय महासचिव जालेश्वर उरांव, कोषाध्यक्ष बिरसा उरांव, सुधू भगत, सोमे उरांव, बेंजामिन लकड़ा सहित भारी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे।