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*लोहरदगा का लाल सत्यप्रकाश ने मुंबई में मचाया धमाल*

By Team lohardaga live

Culture
सत्यप्रकाश

*अनुपम खेर के एक्टिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लेकर अभिनय की सीखी बारीकियां*

लोहरदगा की मिट्टी से मुंबई की रौशनी तक पहुंचने वाला सत्य प्रकाश आज हर उस युवक के लिए प्रेरणा बन चुका है जो छोटे गांव से बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है। झारखंड के लोहरदगा जिले के एक शांत गांव में पले-बढ़े सत्य प्रकाश के बचपन के दिन मिट्टी की खुशबू और खेतों की ओस में बीते। वहीं से उनके भीतर कुछ अलग करने का जुनून जागा। बचपन से ही उन्होंने तय कर लिया था कि जिंदगी सिर्फ सुरक्षित रास्ते पर नहीं, बल्कि अपने सपनों की दिशा में जी जानी चाहिए।

सत्य प्रकाश की शुरुआत एक आम छात्र की तरह हुई। उन्होंने डीपीएस रांची से 12वीं की और फिर के.आई.आई.टी भुवनेश्वर से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद हैदराबाद की एक कंपनी में चार साल तक स्थायी नौकरी की। घरवालों को लगा कि अब सब कुछ तय हो गया है अच्छी नौकरी, स्थिर जीवन और सुरक्षित भविष्य। लेकिन सत्य प्रकाश के मन में कुछ अधूरा था। दफ्तर की कुर्सी पर बैठे-बैठे जब भी वह आईने में खुद को देखते, तो एक सवाल बार-बार सामने आता क्या यही वो जिंदगी है जो मैं जीना चाहता हूं?

*सपनो की कीमत संघर्ष से चुकाई*

यही सवाल उन्हें मुंबई ले आया उस शहर में जहां सपनों की कीमत संघर्ष से चुकाई जाती है। साल 2020 में, जब दुनिया लॉकडाउन में ठहर चुकी थी, सत्य प्रकाश ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अनुपम खेर के एक्टिंग इंस्टीट्यूट में दाखिला लेकर अभिनय की बारीकियां सीखीं। वहां उन्होंने जाना कि अभिनय सिर्फ डायलॉग नहीं, बल्कि भावनाओं की भाषा है।

*वेब सीरीज़ में बॉबी देओल व आर्यन खान के साथ आएंगे नजर*

धीरे-धीरे सत्य प्रकाश ने अपने अभिनय से लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने पंचायत, हॉस्टल डेज़, ग्राउंड ज़ीरो और The Bats of Bollywood जैसे प्रोजेक्ट्स में अपनी पहचान बनाई। अब वे नेटफ्लिक्स की आने वाली वेब सीरीज़ में बॉबी देओल और आर्यन खान के साथ नजरआने वाले हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक नया काम नहीं, बल्कि उस सपने की मंज़िल है जो लोहरदगा की गलियों से शुरू हुई थी।

*...और गर्व से मां की आँखे हुई नम*

घर में जब पहली बार टीवी पर उनका चेहरा दिखा, तो मां की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू थे। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को कभी खेतों में दौड़ते देखा था, आज वही बड़े सितारों के साथ स्क्रीन पर है। भगवान ने हमारी मेहनत रंग लाई। उनके पिता डॉ. टी. साहू, जो भारतीय सेना से रिटायर्ड हैं, कहते हैं, हम अक्सर बच्चों को अपनी इच्छाओं के बोझ तले दबा देते हैं। लेकिन हर बच्चे के भीतर एक अपना रास्ता होता है। अगर हम उन्हें उड़ने की आज़ादी दें, तो वे आसमान छू सकते हैं जैसे मेरे बेटे ने किया।

*कहानियां जीना चाहते हैं*

सत्य प्रकाश कहते हैं कि वह सिर्फ किरदार नहीं निभाना चाहते, बल्कि वो कहानियां जीना चाहते हैं जिनमें सच्चाई, संघर्ष और इंसानियत हो। उनका सपना है कि झारखंड के बच्चे यह महसूस करें कि अगर वह कर सकते हैं, तो कोई भी कर सकता है। मुंबई की चमक के बीच भी सत्य प्रकाश अपने गांव लौटते हैं, खेतों की मिट्टी को छूते हैं और वही मिट्टी उन्हें याद दिलाती है कि जड़ें कभी पीछे नहीं छोड़ी जातीं।

*सोच की जीत*

सत्य प्रकाश की कहानी सिर्फ एक युवक की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जिसने साबित किया कि गांव की गलियां भी मंज़िल की ओर जाती हैं। लोहरदगा की मिट्टी में जन्मा यह नाम अब मुंबई की रौशनी में चमक रहा है और हर उस दिल में उम्मीद जगा रहा है जो छोटे गांव से बड़े सपने देखने का साहस रखता है।