तीन माह काम कराया, मजदूरी के नाम पर खाली हाथ लौटे 13 मजदूर
By Team orangehindi

चमोली में निर्माण कार्य कराने ले जाने वालों पर मजदूरों का आरोप, श्रम अधीक्षक से लगाई बकाया भुगतान की गुहार
लोहरदगा। रोजगार की तलाश में उत्तराखंड गए लोहरदगा के 13 प्रवासी मजदूर तीन महीने काम करने के बाद कथित तौर पर बिना मजदूरी लिए वापस लौट आए। शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द उरांव के नेतृत्व में मजदूरों ने लोहरदगा के श्रम अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी और बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की।
मजदूरों का कहना है कि दुमका निवासी मुन्ना कुमार और उसके भाई राजकुमार मिर्धा ने अच्छी दैनिक मजदूरी दिलाने का भरोसा देकर उन्हें जोशीमठ, चमोली (उत्तराखंड) ले जाया था। वहां उन्हें आईटीबीपी की निर्माणाधीन बिल्डिंग के काम में लगाया गया। मजदूरों ने निर्माण कार्य से जुड़े जेई का नाम अंशुल राणा तथा मुख्य ठेकेदार का नाम शिवम बताया है।
आरोप है कि मजदूरों से करीब तीन महीने तक काम कराया गया, लेकिन काम की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। आर्थिक परेशानी के बीच मजदूर किसी तरह वापस लोहरदगा पहुंचे और अब श्रम विभाग से न्याय की उम्मीद लगाए हुए हैं।
मजदूरों की शिकायत पर श्रम अधीक्षक ने बकाया भुगतान के लिए हरसंभव प्रयास करने का आश्वासन दिया। इधर, मजदूरों ने अन्य श्रमिकों को भी सावधान करते हुए कहा कि रोजगार के नाम पर किसी के भरोसे बाहर न जाएं। संबंधित कंपनी, फर्म, ठेकेदार और कार्यस्थल की पूरी जानकारी सत्यापित करने के बाद ही बाहर जाने का निर्णय लें। उन्होंने श्रमिकों से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने से पहले श्रम अधीक्षक कार्यालय में आवश्यक निबंधन कराने की अपील की।
शिकायतकर्ताओं में राम उरांव, नेहा उरांव, राम प्रकाश उरांव, सुषमा उरांव, लखिया उरांव, जुगेश उरांव, लीलमुनी उरांव, सुनीता उरांव, आशीष उरांव, राजकिशोर उरांव, सोनिया उरांव, बबलू उरांव और फुलमनी उरांव शामिल हैं।इस संस्करण में आरोपों को आरोप के रूप में ही रखा गया है, ताकि खबर प्रभावी होने के साथ कानूनी रूप से संतुलित रहे।