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आधी रात हॉस्टल से कूदकर पार्टी में पहुंचे 25 से ज्यादा बच्चे, प्रशासन सख्त

By Team Lohardaga live

Education
सिंबोलिक तस्वीर

आवासीय स्कूल से जुड़ा मामला, जांच के आदेश

झारखंड के लोहरदगा जिले में संचालित एक आवासीय विद्यालय से जुड़ा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार हॉस्टल में रह रहे 25 से अधिक छात्र आधी रात को खिड़की फांदकर बाहर निकल गए और कथित तौर पर किसी समारोह में शामिल होने पहुंच गए। विद्यालय में अधिकतर बच्चे गरीब और अनाथ परिवारों से आते हैं।

रात 11 बजे के बाद परिसर से बाहर निकले बच्चे

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, बच्चे देर रात करीब 11 बजे के बाद हॉस्टल से बाहर निकले। बताया जा रहा है कि वे पास में आयोजित किसी कार्यक्रम में मौज-मस्ती करने गए थे। घटना की जानकारी मिलने पर स्कूल प्रबंधन सक्रिय हुआ और बच्चों को वापस लाकर अनुशासन का पाठ पढ़ाया गया। अभिभावकों को भी इसकी सूचना दे दी गई है।

डीसी ने दिए जांच के आदेश

लोहरदगा के उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रबंधन से शोकॉज, अनुशासन पर जोर

आवासीय विद्यालयों के प्रभारी ने स्कूल प्रबंधन से जुड़े संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण (शोकॉज) मांगने की बात कही है। उन्होंने बताया कि बच्चों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अनुशासन का पालन करें और बिना अनुमति परिसर से बाहर न जाएं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि बच्चे देर रात आसानी से परिसर से बाहर निकल जा रहे हैं, तो यह व्यवस्था में गंभीर खामी को दर्शाता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि अगर बच्चों के साथ कोई अनहोनी हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?

विधिक सेवा प्राधिकार ने लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने भी संज्ञान लिया है। अब विभागीय और प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि सुरक्षा और निगरानी में कहां चूक हुई।

प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा सुधार की जरूरत

यह घटना न सिर्फ विद्यालय प्रबंधन बल्कि पूरे तंत्र के लिए चेतावनी है। आवासीय विद्यालयों में रह रहे बच्चों की सुरक्षा, अनुशासन और निगरानी व्यवस्था को लेकर ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।