कानून, कानून-व्यवस्था और पेपर लीक पर सांसद सुखदेव भगत का केंद्र सरकार पर हमला
By Team Lohardaga live

बोले- "ट्रैक ही गलत है तो फास्ट-ट्रैक किस काम का", युवाओं के भविष्य और सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
लोहरदगा। कांग्रेस के लोहरदगा लोकसभा सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली, कानून-व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समस्याओं के मूल कारणों पर काम करने के बजाय केवल नए कानून बनाने और घोषणाएं करने तक सीमित है। उनका कहना है कि जब तक शासन की नीयत और दिशा सही नहीं होगी, तब तक कोई भी कानून अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकेगा।
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। उन्होंने दिल्ली में पैलेट गन के इस्तेमाल और बिहार में खुलेआम एके-47 जैसे हथियारों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर जवाब मांगा है।
सरकार की फास्ट-ट्रैक न्याय व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केवल मामलों का त्वरित निपटारा करने की बात पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, "जब ट्रैक ही गलत है तो फास्ट-ट्रैक किस काम का?" उनके अनुसार पहले सरकार को अपनी नीतियों, प्राथमिकताओं और कार्यशैली में सुधार करना होगा, तभी न्याय व्यवस्था प्रभावी हो सकेगी।
महात्मा गांधी के 'साधन और साध्य' के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए सांसद ने कहा कि यदि लक्ष्य तक पहुंचने के साधन ही सही नहीं होंगे तो परिणाम भी सकारात्मक नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे परीक्षा में धांधली रोकने के लिए नया कानून बनाए या अन्य अपराधों पर कठोर प्रावधान लागू करे, यदि उसकी नीयत पारदर्शी नहीं होगी तो जनता को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय केवल घोषणाएं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित मंत्री संसद और देश के युवाओं के सामने स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं, जिससे युवाओं में असंतोष और निराशा बढ़ रही है।
सांसद ने कहा कि देश को केवल नए कानूनों की नहीं, बल्कि पारदर्शी शासन, ईमानदार नीयत और जवाबदेह प्रशासन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार जब तक अपनी सोच और कार्यशैली में बदलाव नहीं लाएगी, तब तक कानूनों का वास्तविक लाभ आम नागरिकों और देश के युवाओं तक नहीं पहुंच पाएगा।