विदेश नीति पर सांसद सुखदेव भगत का केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार
By Team Lohardaga live

भारत की पहचान शांति और संवाद, फिर सरकार की चुप्पी क्यों?
लोहरदगा: लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने भारत की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश की ऐतिहासिक कूटनीतिक पहचान शांति, संवाद और अहिंसा की रही है, लेकिन वर्तमान समय में सरकार का रुख अस्पष्ट और विरोधाभासी दिखाई दे रहा है।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संविधान का हवाला
सांसद भगत ने कहा कि भारत हमेशा से किसी भी संप्रभु राष्ट्र पर आक्रमण के खिलाफ रहा है और अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीतिक संवाद से होना चाहिए। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और 2(7) तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रावधानों में अंतरराष्ट्रीय शांति, संप्रभुता के सम्मान और संवाद की नीति को प्राथमिकता दी गई है। उनके अनुसार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इन सिद्धांतों का उल्लंघन होता दिखाई दे रहा है और भारत को इस पर स्पष्ट तथा नैतिक रुख अपनाना चाहिए।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन की विरासत का उल्लेख
उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के माध्यम से दुनिया को संतुलित और स्वतंत्र कूटनीति का संदेश दिया था। उस दौर में यह सिद्धांत स्थापित किया गया कि हर देश को अपनी सरकार चुनने और अपने आंतरिक मामलों का संचालन स्वयं करने का अधिकार है।
विदेश नीति पर भटकाव का आरोप
सुखदेव भगत ने कहा कि विदेश नीति किसी एक दिन में तय होने वाली प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह देश की ऐतिहासिक विरासत, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और दीर्घकालिक रणनीति पर आधारित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत की विदेश नीति अपने पारंपरिक मूल्यों से भटकती हुई नजर आ रही है।
वाजपेयी और मोदी की नीतियों की तुलना
सांसद ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीतियों की तुलना करते हुए कहा कि विशेषकर मध्य-पूर्व को लेकर दोनों दौर के दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। उनके अनुसार भारत का स्टैंड हमेशा शांति, वार्ता और अहिंसा पर आधारित रहा है, लेकिन मौजूदा समय में वह स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति बन रही है।
मध्य-पूर्व और ईरान पर स्पष्ट रुख की मांग
मध्य-पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि इस क्षेत्र से भारत के संबंध ऐतिहासिक रूप से गहरे और प्रगाढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि ईरान जैसे महत्वपूर्ण देश के प्रति उसका क्या रुख है। बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या की घटना को अनुचित बताते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत हैं।
युद्ध नहीं, संवाद ही समाधान
सांसद भगत ने जोर देकर कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि भारत अपनी पारंपरिक नीति शांति, संवाद और कूटनीतिक संतुलन पर मजबूती से कायम रहे और अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट व नैतिक रुख अपनाए।
