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नए कानून से मजदूरों का पलायन बढ़ेगा, बेरोजगारी में होगी वृद्धि: सांसद सुखदेव भगत

By Team Lohardaga live

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सांसद सुखदेव भगत

मनरेगा बचाओ अभियान के तहत कांग्रेस का देशव्यापी आंदोलन, 5 जनवरी से विरोध प्रदर्शन शुरू

लोहरदगा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए जा रहे बदलावों पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने काम के अधिकार की रक्षा के लिए 5 जनवरी से पूरे देश में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ किया है।

सांसद भगत ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए जा रहे परिवर्तन सुधार के उद्देश्य से नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत से काम, सम्मान और पंचायतों के अधिकार छीनने की साजिश हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जिसे वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था, एक अधिकार-आधारित कानून है। इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार मांगने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।

उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य है। मनरेगा के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिन तक काम मांगने का अधिकार है, लेकिन नए प्रावधानों में पंचायतों की भूमिका सीमित की जा रही है और काम तभी मिलेगा जब केंद्र सरकार पंचायत को अधिसूचित करेगी तथा बजट उपलब्ध कराएगी।

श्री भगत ने आरोप लगाया कि जहां पहले मनरेगा में मजदूरी की पूरी राशि केंद्र सरकार देती थी, वहीं नए कानून ‘वी बी जी राम जी’ के तहत केंद्र सरकार केवल 60 प्रतिशत मजदूरी देगी और शेष 40 प्रतिशत का भार राज्य सरकारों पर डाल दिया गया है। इससे राज्यों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा और रोजगार सृजन प्रभावित होगा।

उन्होंने कहा कि इस नए कानून के कारण बेरोजगारी में वृद्धि होगी, न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान होगा, मजदूरों का पलायन बढ़ेगा तथा महिलाओं की भागीदारी में गिरावट आएगी। आदिवासी और दलित परिवार इस बदलाव से सबसे अधिक प्रभावित होंगे। गांवों में परिसंपत्तियों के निर्माण का अधिकार समाप्त हो जाएगा और पंचायतें केवल एक एजेंसी बनकर रह जाएंगी, जिनके पास निर्णय लेने का अधिकार नहीं होगा।

सांसद भगत ने बताया कि 5 जनवरी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा नए कानून ‘वीबी जी राम जी’ के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की हत्या गोडसे ने की थी और अब केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी के नाम और उनके विचारों की हत्या की है।