हिंडाल्को की खदानों की जांच कराए एनजीटी, पर्यावरण प्रदूषण पर उठाए सवाल
By Team orangehindi

लोहरदगा-गुमला में बॉक्साइट खनन से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का आरोप, चैंबर अध्यक्ष रीतेश कुमार ने केंद्र और राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग की
लोहरदगा। लोहरदगा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रीतेश कुमार ने लोहरदगा और गुमला जिले में संचालित बॉक्साइट खदानों से पर्यावरण को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से हिंडाल्को कंपनी की खनन गतिविधियों की गहन जांच कराने तथा पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई करने की अपील की है।
रीतेश कुमार के अनुसार, दोनों जिलों के बगड़ू, भुसाड़, हिसरी, पाखर, बिमरला, सेरेंगदाग, जालिम, सनई, अमतीपानी, गुरदरी, कुजाम और अन्य क्षेत्रों में लंबे समय से बॉक्साइट का खनन और परिवहन किया जा रहा है। उनका आरोप है कि खनन के दौरान पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा तथा स्थानीय लोगों के सामाजिक हितों से जुड़े प्रावधानों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि खनन और परिवहन के कारण फैलने वाली लाल धूल से क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की जांच आवश्यक है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रमिकों के हितों और ट्रक मालिकों की समस्याओं को भी गंभीरता से लेने की मांग की।
चैंबर अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन और स्थानीय लोगों के हितों से जुड़े मुद्दे अक्सर औपचारिकता तक सीमित रह जाते हैं। उन्होंने एनजीटी से खदानों की जांच कराने, प्रभावित रैयतों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का आकलन करने तथा खनन से जुड़े पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की समीक्षा करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए