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डंपिंग यार्ड के बॉक्साइट की धूल फांक कर बीमार हो रहे हैं लोग

By Teem Lohardaga live

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रोड की बदतर स्थिति

लोहरदगा। बॉक्साइट नगरी लोहरदगा के लोग इस खनिज के जरिए खुशहाली और समृद्धि तो नहीं पा सके। उल्टा बॉक्साइट की धूल फांक कर बीमार जरूर हो रहे हैं।

लोहरदगा प्रखंड अंतर्गत हेसल गांव में बने बॉक्साइट डंपिंग साइडिंग की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। ट्रक चालकों की मनमानी से आए दिन सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे आम राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

आजसू के केंद्रीय सचिव सूरज अग्रवाल ने बताया कि टोरी स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों को जाम के कारण कई बार ट्रेन छूट जाने की नौबत आ जाती है। उन्होंने कहा कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि यह समझ पाना मुश्किल है कि यह सड़क माइंस की है या पीडब्ल्यूडी की। पूरे रास्ते में बॉक्साइट की धूल उड़ती रहती है, जिससे स्थानीय लोग प्रदूषण और बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हिंडालको कंपनी हो या कार्य एजेंसी, किसी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसा लगता है मानो उन्हें सिर्फ अपने मुनाफे की चिंता है, जनता की नहीं। लाखों-करोड़ों का बॉक्साइट यहां से प्रतिदिन दूसरे प्रदेशों में भेजा जा रहा है, लेकिन बदले में स्थानीय लोगों को धूल और परेशानी ही मिल रही है।

सूरज अग्रवाल ने आगे बताया कि कंपनी ने माइंस से जुड़ी सड़कों की मरम्मत और रखरखाव पूरी तरह से छोड़ दिया है। न सड़क दुरुस्ती की चिंता है और न प्रदूषण नियंत्रण की। उन्होंने कहा कि यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।

उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की चुप्पी सबसे बड़ी चिंता का विषय है। अगर प्रशासन चाहे तो सड़क सुरक्षा और प्रदूषण पर निगरानी रखकर इस समस्या को दूर कर सकता है। लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

सूरज अग्रवाल ने बताया कि लोहरदगा के लोग लंबे समय से बाईपास सड़क की मांग कर रहे हैं, ताकि माइंस से आने-जाने वाले भारी वाहनों से शहर और आबादी वाले इलाके को राहत मिल सके। लेकिन विडंबना यह है कि हेसल की बाईपास सड़क को ही अब माइंस सड़क के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि वह इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान दें, सड़क की मरम्मत और प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि जनता को राहत मिल सके।

अंत में सूरज अग्रवाल ने कहा कि

अगर प्रशासन और कंपनियां अब भी नहीं जागीं, तो कमाने वाले कमा कर चले जाएंगे, और जनता सिर्फ धूल फांकती रह जाएगी।