लोहरदगा में सियासी बयानबाजी तेज, भानु प्रताप शाही के आरोपों पर आलोक साहू का पलटवार
By Team orange hindi

सांसद सुखदेव भगत पर लगाए आरोपों को बताया बेबुनियाद, बोले—सबूत दें या जनता से माफी मांगें, नहीं तो मानहानि की कार्रवाई
लोहरदगा। लोहरदगा समाहरणालय परिसर में भाजपा के धरना-प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता व पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही द्वारा सांसद सुखदेव भगत पर नौकरी देने के बदले पैसे लेने का आरोप लगाए जाने के बाद जिले की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस नेता सह लोहरदगा इंटक यूनियन के अध्यक्ष आलोक कुमार साहू ने इन आरोपों को पूरी तरह तथ्यहीन और बेबुनियाद बताते हुए पलटवार किया है।
आलोक साहू ने कहा कि सांसद सुखदेव भगत पर लगाए गए आरोप राजनीतिक कुंठा से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि लोहरदगा की जनता सांसद के काम करने के तरीके और उनकी सार्वजनिक भूमिका से परिचित है। सांसद ने हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम किया है।
भाजपा नेता भानु प्रताप शाही पर निशाना साधते हुए साहू ने कहा कि जिन पर स्वयं विभिन्न मामलों में कानूनी कार्रवाई और जांच का सामना करने का राजनीतिक इतिहास रहा है, उन्हें दूसरों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने से पहले तथ्यों के साथ बात करनी चाहिए। उन्होंने शाही के पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए उनके राजनीतिक जीवन पर भी सवाल उठाए।
साहू ने आरोप लगाया कि मंत्री रहते हुए भानु प्रताप शाही के कार्यकाल में दवा खरीद से जुड़े मामले में गंभीर आरोप लगे थे और विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई का उन्हें सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इन मामलों से जुड़े तथ्य सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं और इन्हें राजनीतिक बयानबाजी के बजाय कानूनी प्रक्रिया के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने वर्ष 2014 से 2019 के दौरान तत्कालीन भाजपा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उस अवधि में जेपीएससी की परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर युवाओं के बीच निराशा रही। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका खामियाजा गरीब और आदिवासी छात्रों को भुगतना पड़ा।
आलोक साहू ने कहा कि यदि भानु प्रताप शाही के पास सांसद सुखदेव भगत द्वारा पैसे लेकर नौकरी देने से संबंधित कोई ठोस प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक करें। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि आरोप प्रमाणित होने पर वह राजनीति छोड़ने को तैयार हैं। वहीं, यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो भानु प्रताप शाही को लोहरदगा की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। साहू ने कहा कि ऐसा नहीं होने पर मानहानि की कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।