30 अगस्त की आदिवासी महाजुटान रैली को लेकर लोहरदगा में सियासी घमासान, अनिल उरांव ने आयोजन पर उठाए सवाल
By Team orange hindi

परिसीमन के मुद्दे पर बोले नगर परिषद अध्यक्ष- आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत
लोहरदगा। 30 अगस्त को रांची में प्रस्तावित आदिवासी महाजुटान रैली को लेकर लोहरदगा में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लोहरदगा नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रैली के आयोजन और इसके पीछे कथित समर्थन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के नाम पर आयोजित की जा रही यह रैली ईसाई धर्मावलंबियों से जुड़े लोगों द्वारा प्रायोजित है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोई स्वतंत्र दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
अनिल उरांव ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन संबंधी विधेयक को लेकर कुछ वर्गों में राजनीतिक और सामाजिक चिंता दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के बाद आदिवासी बहुल क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के स्वरूप में बदलाव हो सकता है और इसी आशंका को लेकर रैली के माध्यम से विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
उन्होंने आदिवासी आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी कई आरोप लगाए। अनिल उरांव का कहना था कि आदिवासी समाज के लिए निर्धारित आरक्षण का लाभ किस प्रकार और किन वर्गों को मिल रहा है, इस पर गंभीरता से विचार और समीक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से आदिवासी समाज के अधिकारों का लाभ कुछ प्रभावशाली वर्गों द्वारा उठाया जा रहा है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
'संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है विधेयक पर समर्थन-विरोध'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में विषय प्रवेश कराते हुए रामचंद्र गिरि ने कहा कि संसद में किसी भी विधेयक को लाना, उस पर चर्चा करना, समर्थन या विरोध करना लोकतांत्रिक एवं संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक धर्म विशेष से जुड़े धार्मिक नेतृत्व की ओर से कथित तौर पर अपने अनुयायियों से परिसीमन के विरोध में 30 अगस्त को रांची पहुंचने की अपील की गई है। उन्होंने इसे लेकर आपत्ति जताई और कहा कि धार्मिक संस्थाओं को राजनीतिक मुद्दों पर अपनी भूमिका को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।
'आदिवासी समाज अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक'
आदिवासी समाज के नेता पवन तिग्गा ने कहा कि आदिवासी समाज अब अपने अधिकारों और राजनीतिक हितों को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो चुका है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर समाज के लोगों को तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर अपनी राय तय करनी चाहिए।
महिला नेत्रियों ने परिसीमन का किया समर्थन
महिला नेत्री सरिता देवी एवं कलावती देवी ने परिसीमन को आदिवासी समाज और महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि परिसीमन से भविष्य में प्रतिनिधित्व के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। दोनों ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन करते हुए इसे देश, राज्य और आदिवासी समाज के हित में बताया।