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डायन प्रथा के खिलाफ उठाएं आवाज : पारस

By Team Lohardaga live

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पशुपति नाथ पारस

लोहरदगा। जिले के पेशरार में गुरुवार को हुई घटना बहुत ही मार्मिक के साथ साथ सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली घटना है। यह घटना हमारे समाज के लिए कलंक और मानवता पर धब्बा है। डायन-विसाही को मानना कुप्रथा है। हम सब जानते हैं कि झारखंड जैसे शिक्षित और विकसित हो रहे राज्य में भी आज कई जगहों पर अंधविश्वास, अज्ञानता और डर के कारण महिलाओं को डायन घोषित कर प्रताड़ित किया जाता है। उक्त बाते जिला भाजपा के महामंत्री सह युवा नेता पशुपति नाथ पारस ने कहा है। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लिए बहुत ही चिंताजनक विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि कभी उन पर जादू-टोने का झूठा आरोप लगाया जाता है, तो कभी उन्हें गांव से निकाल दिया जाता है या मार दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि हमारा संविधान हर नागरिक को जीने का अधिकार देता है। इसलिए राज्य सरकार ने झारखंड डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 2001 बनाकर ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास किया है।

पशुपति नाथ पारस ने लोगों से अपील की कि हमें यह समझना होगा कि बीमारी, दुर्भाग्य या मौत का कारण कोई डायन नहीं, बल्कि अज्ञानता, गरीबी और शिक्षा की कमी है। उन्होंने कहा कि हमें भी मिलकर सहयोग करना होगा और जागरूक जनता की तरह जिम्मेवार बनना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि गांवों में जन-जागरूकता अभियान चलाना होगा, स्कूलों में बच्चों को विज्ञान और तर्क की शिक्षा देनी होगी, और हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना होगा कि अब किसी भी मासूम को डायन नहीं कहा जाएगा, और न ही किसी को अंधविश्वास के नाम पर प्रताड़ित किया जाएगा।