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किस्को में कार्यक्रम के दौरान बच्चों के जवाब से चौंकी हाई कोर्ट जज, बोलीं—आखिर कोई जज क्यों नहीं बनना चाहता

By Team Lohardaga live

Administrative
कार्यक्रम का उद्घाटन करतीं न्यायमूर्ति व अन्य

शिक्षा और फिटनेस को बताया सफलता की कुंजी, पर्यावरण संरक्षण और विधिक जागरूकता पर दिया जोर

कार्यक्रम को संबोधित करतीं न्यायमूर्ति

लोहरदगा। जिले के किस्को प्रखंड में आयोजित मेगा विधिक सशक्तिकरण सह पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम में झारखंड हाई कोर्ट की न्यायाधीश अनुभा रावत चौधरी बच्चों के जवाब सुनकर हैरान रह गईं। कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने छात्र-छात्राओं से उनके भविष्य के सपनों के बारे में पूछा, तो किसी ने डॉक्टर, किसी ने शिक्षक, किसी ने बिजनेस और किसी ने सुरक्षा सेवा में जाने की इच्छा जताई, लेकिन किसी ने जज बनने की बात नहीं कही। इस पर न्यायाधीश ने मुस्कुराते हुए पूछा कि आखिर कोई उनकी जगह क्यों नहीं आना चाहता।

बच्चों ने जवाब दिया कि ऐसा नहीं है कि वे जज नहीं बनना चाहते, बल्कि उन्होंने अभी इस दिशा में सोचा नहीं है। बच्चों की प्रतिभा और आत्मविश्वास से न्यायाधीश काफी प्रभावित नजर आईं।

कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) और जिला प्रशासन लोहरदगा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसका शुभारंभ न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी ने किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन की सभी सफलताओं की कुंजी है। छात्रों को पढ़ाई पर पूरा ध्यान देने के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पढ़ाई और फिटनेस दोनों को संतुलित किया जाए, तो सफलता निश्चित है।

पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के वन राज्य की धरोहर हैं और इन्हें बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग जरूरी है, अन्यथा जल स्तर में गिरावट और पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील की और कहा कि एक पेड़ सौ पुत्रों के बराबर होता है।

खनन क्षेत्र को लेकर उन्होंने निर्देश दिया कि खनन कार्य समाप्त होने के बाद वहां पुनः पौधरोपण किया जाए, ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।

उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी ही व्यक्ति को सशक्त बनाती है। अपने अधिकार और कर्तव्यों को समझकर ही समाज में न्याय और समानता स्थापित की जा सकती है। महिलाओं से उन्होंने बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपील की।

न्यायमूर्ति ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों में ही छात्रों को जाति और आवासीय प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उन्हें आगे की पढ़ाई और रोजगार में सुविधा हो सके।

कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकमल मिश्रा ने बताया कि इसका उद्देश्य आम लोगों को विधिक सेवाओं की जानकारी देना और सरकारी योजनाओं से जोड़ना है। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया कि न्यायमूर्ति के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

वन प्रमंडल पदाधिकारी अभिषेक कुमार ने वन और पर्यावरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस वर्ष जिले में सवा पांच सौ हेक्टेयर में पौधरोपण किया जाएगा।

इस दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 2726 लाभुकों के बीच 29.11 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया।

कार्यक्रम के बाद न्यायमूर्ति ने औद्योगिक सिलाई केंद्र का निरीक्षण किया और महिला समूहों से बातचीत की। परिसर में पौधरोपण भी किया गया।

कार्यक्रम में न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।