लोहरदगा में गूंजा आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान का जयघोष
By Team orange hindi

विश्व आदिवासी दिवस पर पुराना नगर भवन में भव्य आयोजन, विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्रनाथ महतो ने कहा—संस्कृति और पहचान की रक्षा सबकी सामूहिक जिम्मेदारी


लोहरदगा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को पुराना नगर भवन आदिवासी संस्कृति, परंपरा, कला और स्वाभिमान के रंग में रंगा नजर आया। विश्व आदिवासी दिवस संचालन समिति, लोहरदगा की ओर से आयोजित भव्य समारोह में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के संयोजक सुखैर भगत ने की। समारोह में आदिवासी समाज की एकता, अधिकार, संस्कृति और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण संदेश दिए गए।
पारंपरिक रीति-रिवाज से हुआ विधानसभा अध्यक्ष का स्वागत
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्रनाथ महतो का आयोजन स्थल पर आदिवासी परंपरा और रीति-रिवाज के साथ स्वागत किया गया। मांदर, नगाड़ा, अंबा पानी, अक्षत और रोरी के साथ अतिथियों का स्वागत हुआ। दीप प्रज्वलन और मांदर-नगाड़े की पारंपरिक थाप के बीच कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद नगर भवन परिसर आदिवासी गीत, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंज उठा।
आदिवासी संस्कृति देश की अमूल्य धरोहर : रविन्द्रनाथ महतो
मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष रविन्द्रनाथ महतो ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और जीवन-पद्धति भारत की प्राचीन सभ्यता की अमूल्य धरोहर है। आदिवासी समाज ने सदियों से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ प्रकृति और मानव के बीच संतुलन का संदेश दिया है।
उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि आदिवासी समाज अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पहचान को मजबूती के साथ आगे बढ़ाए। युवा पीढ़ी शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की एकता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और अपनी संस्कृति व अधिकारों की रक्षा के लिए समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने आयोजन के लिए संयोजक सुखैर भगत और पूरी संचालन समिति को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान और स्वाभिमान : सुखैर भगत
संचालन समिति के संयोजक सुखैर भगत ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, पहचान और गौरव को याद करने का दिन है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि लोहरदगा की धरती ने हमेशा आदिवासी एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश दिया है। आज के आयोजन में उमड़ी भीड़ उसी गौरवशाली परंपरा की ताकत को दर्शाती है। भाषा, संस्कृति, पारंपरिक पर्व और जीवन-पद्धति आदिवासी समाज की असली पहचान हैं और इन्हें बचाना केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
खोड़हा दलों की प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण पारंपरिक नृत्य-खोड़हा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। मांदर और नगाड़े की थाप पर कलाकारों ने पारंपरिक गीत और नृत्य प्रस्तुत किए। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को उत्साह और उमंग से भर दिया। दर्शकों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का खूब आनंद लिया।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण सुखैर भगत ने दिया। मंच संचालन नेसार अहमद ने किया, जबकि खोड़हा कार्यक्रम का मंच संचालन खुशी रानी कुजूर ने किया।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बोकारो कांग्रेस जिलाध्यक्ष जवाहर महथा, धनबाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, झारखंड प्रदेश महासचिव शशिभूषण राय, उप समाहर्ता जितेंद्र मुंडा, डीएसपी दिवाकर, पूर्व प्राचार्य प्रो. लोहरा उरांव, समाज कल्याण पदाधिकारी अलोका चौधरी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में संचालन समिति के नेसार अहमद, मोहन दुबे, शाहिद अहमद बेलू, सलीम अंसारी, पवन गौतम, सत्यजीत सिंह, प्रकाश उरांव, जुगल भगत, तनवीर गौहर, संतोष उरांव, संतोषी उरांव, सानियरों उरांव, संगीता उरांव, संतोष महतो, हरी उरांव, किशोर उरांव, दानिश अली, अनिल उरांव, कार्तिक उरांव, मनीष मुंडा, बुधवा उरांव, सबिता कुमारी, हामीद अंसारी, महताब आलम, रामदेव उरांव, महावीर उरांव, मुनीम अंसारी, स्वाति कुमारी, रूपा देवी, चन्दर उरांव, सोनू, रविन्द्र सिंह खेरवार, विनोद सिंह खेरवार और माज अंसारी सहित पूरी संचालन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सांस्कृतिक आयोजन के साथ दिया एकजुटता का संदेश
विश्व आदिवासी दिवस का यह आयोजन महज सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। समारोह के माध्यम से आदिवासी समाज की एकता, अस्मिता, अधिकार, सम्मान और स्वाभिमान का संदेश भी सामने आया। बड़ी संख्या में लोगों और विभिन्न नृत्य-खोड़हा दलों की भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया।
समारोह के दौरान आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपरा, कला और सामाजिक मूल्यों को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संकल्प लिया गया। शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और संगठन के माध्यम से समाज को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।
मांदर की थाप ने दिया विरासत बचाने का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश उभरकर सामने आया कि आदिवासी समाज के लिए संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि उसकी पहचान और स्वाभिमान है। अपनी विरासत को बचाना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है।
आयोजन समिति की ओर से विश्व आदिवासी दिवस पर समस्त आदिवासी समाज और लोहरदगा वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं।