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छत्तीस देवी मंदिर: आस्था और भक्ति का केंद्र

By Team Lohardaga Live

Culture
मौके पर उपस्थित श्रद्धालु

लोहरदगा के चट्टी गांव में स्थित छत्तीस देवी मंदिर लोगों के श्रद्धा और विश्वास का अप्रतिम केंद्र है। यह मंदिर 1995 में स्थानीय भक्त जगतपाल साहू द्वारा बनाया गया था और तब से यहां नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर की विशेषता यह है कि यहां माता दुर्गा के अलावा भगवान हनुमान, सूर्य भगवान और कई अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा होती है।

नवरात्र में उमड़ती है भीड़

शारदीय नवरात्र में माता के दिव्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। मंदिर निर्माता द्वारा वाराणसी और प्रयागराज से कथा वाचक और पंडितों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना के साथ पाठ और कथा का आयोजन कराया जाता है। श्रद्धालु माता के नौ स्वरूपों को अपने आंखों में बसा लेने को आतुर दिखते हैं।

मंदिर की विशेषता

मंदिर में माता दुर्गा के अलावा पशु-पक्षियों को भी देव मानकर उनकी पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता रानी पूरी करती हैं। यही कारण है कि इस मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल चुकी है।

मंदिर का महत्व

छत्तीस देवी मंदिर लोहरदगा के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां की पूजा-अर्चना और भक्ति गीतों से पूरे इलाके का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मंदिर की स्थापना और नियमित पूजा-अर्चना ने लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान बना लिया है।