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आदिवासी समाज ही है पर्यावरण का संरक्षक : मनोरमा एक्का

By Team Lohardaga live

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लोहरदगा। छतरबगीचा स्थित होप कार्यालय के हॉल में सोमवार को भंडरा प्रखंड के गडरपो एवं जमगाई पंचायत की महिलाओं, किशोरियों तथा स्थानीय नेतृत्वकर्ताओं की एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला फीमी और होप के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुई, जिसमें कुल 44 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आदिवासी इतिहास को जानना तथा आदिवासी कला, भाषा, संस्कृति, खेल और पारंपरिक बीजों के संरक्षण एवं संवर्द्धन को बढ़ावा देना था। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए फीमी की मैनेजिंग ट्रस्टी मनोरमा एक्का ने कहा कि आदिवासी समाज ही पर्यावरण का वास्तविक संरक्षक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी महिलाएं समाज में उभरती हुई नेतृत्वकर्ता हैं, जिनकी भूमिका भाषा, संस्कृति, पहनावा, खेल और पारंपरिक बीजों को बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मनोरमा एक्का ने कहा कि वर्तमान समय में आदिवासी संस्कृति और पहचान पर हो रहे हमलों के खिलाफ संगठित होकर पुरजोर विरोध करने की आवश्यकता है। यह कार्यक्रम लोहरदगा जिले के चार प्रखंडों के आठ पंचायतों में संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत यह चौथा कार्यशाला था।

कार्यशाला के दौरान पारंपरिक बीजों के संवर्धन एवं उपयोग, अंधविश्वास, बाल विवाह, बाल दुर्व्यापार, चाइल्ड हेल्पलाइन, आपातकालीन सेवा 100 और 108 नंबरों की जानकारी पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने अपनी भाषा, संस्कृति और पारंपरिक बीजों को संरक्षित करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में मनोरमा एक्का, अरविंद वर्मा, उज्ज्वल कुशवाहा, बिनीता उरांव, सरिता एक्का सहित अन्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।