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दो दिवसीय क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव का हुआ समापन

By Team lohardaga live

Culture
पुरुष्कार के साथ प्रतिभागी बच्चे

सीतामढ़ी में होने वाली अखिल भारतीय प्रतियोगिता में झारखंड की टीम करेगी प्रतिनिधित्व

लोहरदगा। शील अग्रवाल सरस्वती विद्या मंदिर परिसर में दो दिवसीय क्षेत्रीय संस्कृति महोत्सव का भव्य समापन मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ हुआ। विद्या भारती उत्तर-पूर्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विद्यालयों के भैया-बहनों ने इस महोत्सव में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। शिशु एवं बाल वर्ग में कथा-कथन, किशोर एवं तरुण वर्ग में आशु-भाषण तथा मूर्तिकला जैसी हस्तकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। आचार्य वर्ग के लिए वक्रतुंड एवं कौशल प्रतिभा के विकास हेतु आदर्श पत्रावाचन प्रतियोगिता रखी गई।

समापन समारोह के अवसर पर अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्मा जी राव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ प्रदेश सचिव नकुल शर्मा, पूर्व सांसद सुदर्शन भगत, संघ के विभाग प्रचारक शम्मी कुमार, पलामू विभाग के निरीक्षक अखिलेश कुमार, कार्यक्रम संयोजक शशिधर लाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष विनोद राय, सचिव अजय प्रसाद, राजी पड़हा के बेल लक्ष्मीनारायण भगत, क्षेत्रीय संयोजक विवेक नयन पांडे, प्रधानाचार्य बिपिन कुमार दास तथा सुंदरी देवी शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे समेत नगर के अनेक गणमान्य व्यक्ति और अभिभावक उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती, तथा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ वंदना द्वारा की गई। अतिथियों को शाल, श्रीफल, डायरी और वीर बजरंगबली की स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। क्षेत्रीय संस्कृति संयोजक सह रांची विभाग प्रमुख विवेक नयन पांडे ने बताया कि कुल छह वर्गों में बारह प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें 154 भैया-बहनों और उनके संरक्षक आचार्यों ने भाग लिया। मंच संचालन आशुतोष कुमार मिश्र ने किया।

प्रदेश सचिव नकुल शर्मा ने कहा कि हमें ऐसी मधुर और विनम्र भाषा बोलनी चाहिए जिससे मन का अहंकार दूर हो जाए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि चरित्र निर्माण के लिए आत्मविश्वास, आत्मज्ञान, आत्मनिर्भरता, आत्मसंयम और त्याग आवश्यक गुण हैं। एकल गीत प्रस्तुति सुप्रिया घोषाल ने दी।

अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्मा जी राव ने कहा कि संस्कृति बोध परियोजना चार प्रमुख दिशाओं ज्ञान परीक्षा, प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन और चित्र-साहित्य प्रकाशन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि संस्कृति का मूल भाव आत्मा से जुड़ा है और यह स्वस्थ, भौतिक तथा आध्यात्मिक जीवन के संतुलन से प्रकट होता है। उन्होंने भैया-बहनों को स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने और राष्ट्रभक्ति को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें ना रहें।

कार्यक्रम संयोजक शशिधर लाल अग्रवाल ने भारत की गुरुकुल परंपरा, महापुरुषों के आदर्श और संस्कारों की पहचान पर प्रकाश डाला। पुरस्कार वितरण की घोषणा प्रांत संयोजक रमेश कुमार सिंह ने की। ओवरऑल परिणाम में प्रथम स्थान लोक शिक्षा समिति बिहार, द्वितीय स्थान विद्या विकास समिति (झारखंड) और तृतीय स्थान भारती शिक्षा समिति (बिहार) को प्राप्त हुआ। विजेता टीम आगामी 4 से 7 नवंबर तक सीतामढ़ी (बिहार) में होने वाली अखिल भारतीय प्रतियोगिता में भाग लेकर अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेगी। लोकनृत्य वर्ग में झारखंड प्रांत की टीम चयनित हुई।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन गुमला विभाग के विभाग प्रमुख ओमप्रकाश सिन्हा ने किया। सभी प्रतिभागी भैया-बहन और पदाधिकारी पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित रहे। अतिथियों ने प्रतिभागियों की सृजनात्मकता, अनुशासन और संस्कृति के प्रति निष्ठा की सराहना की तथा कहा कि ऐसे आयोजन न केवल प्रतिभाओं को मंच देते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और गौरव के प्रति आत्मविश्वास को भी सुदृढ़ करते हैं। वंदे मातरम् के गूंजते स्वर के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।