7 साल पहले मृत घोषित महिला अचानक लौटी घर, परिजनों और गांव वालों के उड़ गए होश
By Pritam

मुंबई की संस्था की पहल से डफली उरांव पहुंचीं अपने पैतृक घर, बिना शव देखे कपड़ों के आधार पर हुई थी पहचान


लोहरदगा। जिले के कुटमू में शुक्रवार की सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब करीब सात साल पहले मृत घोषित की जा चुकी डफली उरांव अचानक अपने घर पहुंच गईं। जिस महिला को परिवार मृत मानकर अंतिम संस्कार कर चुका था, उसे सामने जीवित देखकर परिजन और गांव के लोग कुछ देर के लिए हक्का-बक्का रह गए। परिवार ने महिला की पहचान डफली उरांव, पिता स्वर्गीय सुकरा उरांव, उम्र करीब 45 वर्ष के रूप में की है।
परिजनों के अनुसार, करीब सात वर्ष पहले डफली उरांव की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और इसी दौरान वह घर से निकल गई थीं। काफी खोजबीन के बाद परिजनों ने लोहरदगा थाना में उनकी गुमशुदगी की सूचना दी थी। कुछ समय बाद कुड़ू थाना की ओर से परिवार को बुलाया गया और एक लावारिस महिला के शव के कपड़े दिखाए गए। कपड़े डफली के कपड़ों से मिलते-जुलते थे। परिवार ने कपड़ों के आधार पर ही महिला की पहचान डफली के रूप में कर ली।
परिजनों के अनुसार, उन्हें शव दिखाए बिना ही यह बताया गया कि महिला की मौत हो चुकी है और शव की स्थिति के कारण उसे दफना दिया गया है। इसके बाद परिवार ने डफली को मृत मानकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया। करीब सात वर्षों तक परिवार इसी विश्वास के साथ जीता रहा कि डफली अब इस दुनिया में नहीं हैं।
लेकिन शुक्रवार को कहानी ने अचानक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मुंबई की श्रद्धा रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन की टीम डफली उरांव को लेकर उनके पैतृक घर पहुंची। संस्था के सदस्यों ने बताया कि वे सड़क पर बेसहारा घूमने वाले और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को अपने संरक्षण में लेकर उनका उपचार और पुनर्वास करते हैं।
संस्था के अनुसार, वर्ष 2026 में डफली उरांव ओडिशा के खुर्दा स्थित मिशन आसरा के माध्यम से उनके संपर्क में आई थीं। उपचार और देखभाल के दौरान महिला ने अपना पता लोहरदगा के कुटमू के रूप में बताया। इसके बाद संस्था ने जानकारी जुटाकर उनके परिवार का पता लगाया और उन्हें लेकर लोहरदगा पहुंची।
घर पहुंचने पर डफली के भाई और मां ने उन्हें पहचान लिया। सात साल बाद बेटी को जीवित और सामने देखकर परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जिस घर में वर्षों पहले मातम छा गया था, उसी घर में अचानक खुशियां लौट आईं। आसपास के लोग भी इस असाधारण घटना को लेकर हैरान नजर आए।
हालांकि, इस खुशी के बीच परिजनों के मन में कई सवाल भी हैं। उनका कहना है कि यदि उस समय महिला की पहचान की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट तरीके से होती और शव दिखाकर पुष्टि कराई जाती, तो परिवार को सात वर्षों तक इस गलतफहमी में नहीं रहना पड़ता। कपड़ों के आधार पर हुई पहचान ने अब पूरी घटना को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
डफली के लापता होने के बाद उनके पति की भी मौत हो चुकी है। ऐसे में सात साल बाद उनकी वापसी परिवार के लिए खुशी के साथ बीते वर्षों की कई यादों को भी वापस ले आई है।