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भाषा-संस्कृति और पारंपरिक खेलों को बचाने का महिलाओं ने लिया संकल्प

By Team orangehindi

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भाषा-संस्कृति और पारंपरिक खेलों को बचाने का महिलाओं ने लिया संकल्प

चार प्रखंडों की 80 दीदियों ने दो दिवसीय प्रशिक्षण में सीखा आदिवासी विरासत के संरक्षण का गुर

लोहरदगा। भाषा, संस्कृति, पारंपरिक खेल और आदिवासी ज्ञान को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से HOPE और FIMI के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय फॉलोअप प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें चार प्रखंडों की करीब 80 महिलाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अपनी भाषा, संस्कृति और पारंपरिक विरासत को बचाने के लिए सामुदायिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में आदिवासी भाषाओं एवं संस्कृति के संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय जानकारियों के दस्तावेजीकरण, विलुप्त होते पारंपरिक खेलों के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों को समुदाय के बीच इन गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए व्यवहारिक जानकारी और मार्गदर्शन दिया गया।

इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित लहेरी बाई के संघर्ष और पारंपरिक बीजों के संरक्षण के प्रयासों का उदाहरण देकर प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया। बताया गया कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद 150 से अधिक पारंपरिक बीजों को संरक्षित रखने का कार्य किया है।

वहीं, उज्ज्वल कुशवाहा ने सिमडेगा की रेशमा लकड़ा से संबंधित ‘कौन बनेगा करोड़पति’ कार्यक्रम की वीडियो क्लिप दिखाकर प्रतिभागियों में आत्मविश्वास और प्रेरणा जगाने का प्रयास किया।

प्रशिक्षण में कहा गया कि भाषा, संस्कृति, पारंपरिक खेल और ज्ञान किसी भी समुदाय की पहचान और विरासत के महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए महिलाओं, युवाओं और समुदाय की सामूहिक भागीदारी जरूरी है। प्रशिक्षण का उद्देश्य पूर्व में दिए गए प्रशिक्षण की प्रगति की समीक्षा करना, अनुभव साझा करना और आगामी गतिविधियों की कार्ययोजना तैयार करना रहा।

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